नगर निगम चुनावों में निर्विरोध जीत पर उठा बवाल, लोकतंत्र पर भीड़तंत्र के कब्जे का आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर तीखे आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले यह गठबंधन वोट चुराने का काम करता था और अब उम्मीदवारों को ही चुरा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा माहौल बन गया है, जहां लोकतंत्र पर भीड़तंत्र का कब्जा होता जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने यह बयान महायुति के 68 उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया।

निर्विरोध जीत पर सवाल, लोकतंत्र की आत्मा पर चोट

उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी चुनाव में निर्विरोध जीत लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन ने दबाव, डर और सत्ता के बल पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया। ठाकरे के अनुसार, यह केवल चुनावी प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं बल्कि जनता के मताधिकार को कुचलने जैसा है। उन्होंने कहा कि जब मुकाबला ही नहीं होने दिया जाएगा, तो जनता अपनी राय कैसे रखेगी।

राज ठाकरे 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक अहम संकेत उस समय मिला, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे करीब 20 साल बाद शिवसेना भवन पहुंचे। यहां उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मुलाकात हुई, जहां दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पार्टी का मेनिफेस्टो भी जारी किया। इस मुलाकात को महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निगम चुनावों के मद्देनजर यह मुलाकात विपक्षी एकजुटता का संकेत हो सकती है।

फडणवीस का पलटवार: घुसपैठियों पर सख्ती और मराठी-हिंदू मेयर का वादा

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्ली में आयोजित एक रैली में विपक्ष पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर निकालेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मुंबई को एक ऐसा मेयर मिले, जो मराठी और हिंदू हो। फडणवीस के इस बयान को आगामी नगर निगम चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

भाषा विवाद नहीं, विकास चाहते हैं मुंबईकर: फडणवीस

मुख्यमंत्री फडणवीस ने भाषा विवाद को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई भी मुंबई को महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों से अलग नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मुंबईकर किसी विवाद में नहीं, बल्कि विकास में विश्वास रखते हैं। उनके अनुसार, यह चुनाव मुंबई और उसके जागरूक नागरिकों के भविष्य से जुड़ा है, जो अब प्रगति और सुशासन चाहते हैं।

बीएमसी पर पूर्व शासकों की निष्क्रियता का आरोप

फडणवीस ने कहा कि जो लोग पहले बीएमसी को नियंत्रित करते थे, उनकी निष्क्रियता और गलत नीतियों के कारण हजारों मिल मजदूरों को मुंबई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक नगर निगम पर काबिज रहे दलों ने न तो रोजगार की चिंता की और न ही बुनियादी सुविधाओं की, जिसका खामियाजा आम मुंबईकर को भुगतना पड़ा।

उद्धव ठाकरे की मांग: निर्विरोध सीटों पर दोबारा चुनाव हों

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मांग की कि जिन नगर निगम वार्डों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, वहां चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए। उन्होंने कहा कि अगर लोकतंत्र में जनता की आवाज को महत्व दिया जाता है, तो हर मतदाता को वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए, चाहे उम्मीदवार एक ही क्यों न हो।

ठाणे में सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत, धांधली का आरोप

ठाणे जिले में बीजेपी और शिवसेना के 32 उम्मीदवारों के निर्विरोध जीतने के बाद विवाद और गहरा गया है। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इन चुनावों में धांधली का आरोप लगाया है। शिवसेना (यूबीटी) के ठाणे प्रमुख केदार दिघे ने कहा कि पूरे राज्य में निर्विरोध घोषित किए गए 68 उम्मीदवारों में से 47 प्रतिशत अकेले ठाणे जिले से हैं, जो अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने इसे महाराष्ट्र के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि भले ही मैदान में एक ही उम्मीदवार हो, फिर भी मतदाताओं को नोटा का विकल्प मिलना चाहिए।

कोर्ट जाने पर भी जनता का फैसला ही अंतिम: फडणवीस

देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे नगर निगम चुनावों में महायुति उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को कोर्ट में चुनौती देते हैं, तब भी जनता का फैसला ही अंतिम माना जाएगा। उन्होंने कहा कि महायुति को जनता का समर्थन मिला है और विपक्ष इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले बीजेपी और उसके महायुति सहयोगियों ने राज्यभर में 68 सीटें निर्विरोध जीत ली हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन ने धमकी और धनबल के जरिए उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर किया। वहीं, एमएनएस ने साफ किया है कि वह इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती देगी।

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