अमेरिकी हिरासत में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, न्यूयॉर्क की बदनाम जेल में बंद

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। चीन ने अमेरिका से दोनों को तुरंत रिहा करने की मांग की है, जबकि उत्तर कोरिया और रूस ने इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। अमेरिका द्वारा किए गए इस ऑपरेशन ने लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया और यूरोप तक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।

चीन की दो टूक: राष्ट्रपति को जबरन ले जाना गलत

चीन के विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को इस तरह जबरन पकड़कर अपने देश ले जाना अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। चीन ने साफ कहा कि वेनेजुएला संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और राजनीतिक संवाद से होना चाहिए। बीजिंग ने अमेरिका से अपील की कि वह स्थिति को और न बिगाड़े तथा राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करे। चीन इससे पहले भी अमेरिका की इस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया जता चुका है।

The China-Russia-North Korea alliance that needs no name | Lowy Institute

उत्तर कोरिया का तीखा हमला: इसे गुंडागर्दी बताया

उत्तर कोरिया ने अमेरिका की कार्रवाई को और भी कठोर शब्दों में खारिज किया है। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वेनेजुएला में अमेरिका का सैन्य हस्तक्षेप खुली गुंडागर्दी है और यह किसी भी देश की आजादी व संप्रभुता पर किया गया सबसे गंभीर हमला है। उत्तर कोरिया का कहना है कि अमेरिका बार-बार ताकत के बल पर दूसरे देशों की सरकारों को गिराने की कोशिश करता रहा है और यह कार्रवाई उसी नीति का हिस्सा है।

रूस की प्रतिक्रिया: फायदे के लिए किसी हद तक जाता है अमेरिका

रूस के सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी अमेरिका की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा उठाए गए कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं, लेकिन इनमें अमेरिका की पुरानी नीति की निरंतरता और साफ मकसद दिखाई देता है। मेदवेदेव के अनुसार, अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए कठोर फैसले लेने से कभी पीछे नहीं हटता, चाहे दुनिया उसे गलत ही क्यों न माने।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक, मेदवेदेव ने कहा कि यह कार्रवाई अचानक नहीं है, बल्कि अमेरिका की दशकों पुरानी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका लैटिन अमेरिका को हमेशा से अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखता आया है और वेनेजुएला के मामले में उसकी नजर वहां के विशाल तेल संसाधनों पर है।

अमेरिकी ऑपरेशन की सैटेलाइट तस्वीरें आईं सामने

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आई हैं। इन तस्वीरों में वेनेजुएला के एक प्रमुख सैन्य अड्डे पर भारी नुकसान साफ नजर आ रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कार्रवाई सीमित नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध और व्यापक थी।

अमेरिकी सेना के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, यह ऑपरेशन महीनों की तैयारी का नतीजा था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से राष्ट्रपति मादुरो की गतिविधियों, उनके ठिकानों और दैनिक दिनचर्या पर नजर रखे हुए थीं। इसी खुफिया जानकारी के आधार पर 2 जनवरी की रात यह सैन्य कार्रवाई की गई।

ढाई घंटे चला सैन्य अभियान, 150 से ज्यादा विमान शामिल

यह सैन्य ऑपरेशन करीब ढाई घंटे तक चला, जिसमें अमेरिका की वायुसेना, नौसेना और स्पेशल फोर्सेज ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। इस कार्रवाई में 150 से ज्यादा सैन्य विमानों और बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया गया। अमेरिका ने एक साथ कई ठिकानों को निशाना बनाया, ताकि राष्ट्रपति मादुरो को भागने का कोई मौका न मिल सके। इसी दौरान मादुरो और उनकी पत्नी को काराकास से हिरासत में लेकर सीधे अमेरिका ले जाया गया।

न्यूयॉर्क की बदनाम जेल में बंद मादुरो

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को फिलहाल न्यूयॉर्क की कुख्यात जेल मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (एमडीसी ब्रुकलिन) में रखा गया है। यह जेल अपनी खराब व्यवस्थाओं और अमानवीय हालात के लिए बदनाम रही है। हालात इतने खराब माने जाते हैं कि कुछ अमेरिकी जजों ने अतीत में यहां कैदियों को भेजने से इनकार तक कर दिया था।

यह जेल 1990 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थी और वर्तमान में यहां करीब 1,300 कैदी बंद हैं। आमतौर पर न्यूयॉर्क की फेडरल अदालतों में मुकदमा झेल रहे आरोपियों को यहीं रखा जाता है। यहां गैंगस्टर, ड्रग तस्कर और बड़े आर्थिक अपराधों के आरोपी बंद रहते हैं।

पहले भी रह चुके हैं विदेशी राष्ट्रपति

मादुरो इस जेल में बंद होने वाले पहले विदेशी राष्ट्रपति नहीं हैं। इससे पहले होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज को भी इसी जेल में रखा गया था। उन पर अमेरिका में कोकीन तस्करी का मामला चला था और बाद में उन्हें 45 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि दिसंबर में डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें माफी देकर रिहा कर दिया था।

फिलहाल इसी जेल में मेक्सिको के कुख्यात सिनालोआ ड्रग कार्टेल के सह-संस्थापक इस्माइल एल मायो जाम्बाडा भी बंद हैं। इसके अलावा एक कारोबारी की हत्या के आरोपी लुइजी मैनजियोने भी यहीं कैद हैं।

हिंसा, बदसलूकी और अव्यवस्था के आरोप

एमडीसी ब्रुकलिन को लेकर कैदियों और उनके वकीलों ने लंबे समय से हिंसा, बदसलूकी और अव्यवस्था की शिकायतें की हैं। साल 2024 में यहां दो कैदियों की हत्या अन्य कैदियों ने कर दी थी। कुछ जेलकर्मियों पर रिश्वत लेने और जेल के भीतर गैरकानूनी सामान पहुंचाने के आरोप भी लगे हैं। साल 2019 की सर्दियों में जेल की बिजली चली गई थी, जिससे यह जेल एक हफ्ते तक अंधेरे और भीषण ठंड में डूबी रही थी।

वेनेजुएला संकट पर जिस तरह से वैश्विक शक्तियां आमने-सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि यह मामला केवल एक देश तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में और तेज हलचल देखने को मिल सकती है।

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