एआई शिखर सम्मेलन के दौरान प्रदर्शन के बाद कार्रवाई, विपक्ष ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली, 24 फ़रवरी। एआई शिखर सम्मेलन के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अर्धनग्न प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। वहीं कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भी इसे अनुचित करार दिया है।
प्रदर्शन और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार राजधानी में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता अर्धनग्न होकर नारेबाजी करते दिखे, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और बाद में युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को भी गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति निर्धारित दायरे में थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन किया। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध को जानबूझकर उग्र करार देकर कार्रवाई की गई।
कांग्रेस का आधिकारिक रुख
कांग्रेस के आधिकारिक एक्स मंच पर जारी बयान में कहा गया कि उदय भानु चिब की गिरफ्तारी असंवैधानिक है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पार्टी ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है और सरकार को असहमति की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना चाहिए। बयान में स्पष्ट किया गया कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को उठाती रहेगी और किसी भी प्रकार के दबाव से पीछे नहीं हटेगी।
मल्लिकार्जुन खरगे का बयान
मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश में युवाओं के लिए रोजगार की स्थिति बेहद गंभीर है और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण युवाओं में असंतोष है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे किसानों और देश के हितों को नुकसान पहुंचा है। खरगे ने कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए इस तरह की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन कांग्रेस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस डरने वाली नहीं है और वह इस गिरफ्तारी की निंदा करती है।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें अपने साथियों पर गर्व है, जिन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ निडर होकर देशहित में आवाज उठाई। राहुल गांधी ने गिरफ्तारी को अनुचित बताया और कहा कि सत्ता को सच दिखाना अपराध नहीं, बल्कि देशभक्ति है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कदम बताया।
प्रियांक खरगे का बयान
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विरोध करना गैरकानूनी नहीं है। उन्होंने माना कि प्रदर्शन का तरीका बेहतर हो सकता था, लेकिन विरोध का अधिकार किसी से छीना नहीं जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी स्वयं भी विभिन्न मुद्दों पर इसी प्रकार के विरोध प्रदर्शन करती रही है। प्रियांक खरगे ने कहा कि इस घटना ने सरकार की अंतरराष्ट्रीय आयोजन क्षमता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी तकरार
इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि सत्तापक्ष के नेता इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यक कार्रवाई बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआई शिखर सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान इस तरह का प्रदर्शन सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता है, लेकिन विपक्ष इसे अपनी आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार मानता है।
युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और युवाओं की निराशा को राष्ट्रीय मंच पर उठाना था। उनका आरोप है कि सरकार जनसरोकार के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए दमनात्मक कदम उठा रही है। दूसरी ओर पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की सुरक्षा चूक बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
उदय भानु चिब की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस नेताओं ने कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जमानत और कानूनी राहत के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर तब जब विपक्ष सरकार पर लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए। फिलहाल, कांग्रेस इस मुद्दे को जनआंदोलन का रूप देने की रणनीति पर विचार कर रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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