प्राथमिकी के बाद बढ़ी हलचल, प्रयागराज पुलिस की टीम वाराणसी पहुंची, आज हो सकती है पूछताछ

वाराणसी। बच्चों से यौन शोषण के गंभीर आरोपों में दर्ज प्राथमिकी के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। 21 फरवरी को प्रयागराज में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सोमवार को प्रयागराज पुलिस की एक टीम वाराणसी पहुंची और स्थानीय पुलिस से शंकराचार्य व उनके करीबी सहयोगियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई।

सूत्रों का कहना है कि पुलिस टीम आज उनके आश्रम पहुंचकर पूछताछ कर सकती है और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी संभव है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए तथ्यों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया जा रहा है। जांच के दायरे में घटनाक्रम की समयरेखा, संबंधित व्यक्तियों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं। स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर प्रयागराज की टीम ने आश्रम परिसर और उससे जुड़े संपर्कों की जानकारी एकत्र की है। 

अदालत में अग्रिम जमानत की मांग, गिरफ्तारी से संरक्षण की अपील

शंकराचार्य की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी की आशंका के कारण न्यायालय से संरक्षण आवश्यक है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत यह देखती है कि प्रथम दृष्टया मामला क्या दर्शाता है, आरोपी का आचरण कैसा रहा है और जांच में सहयोग की स्थिति क्या है। अदालत यदि अंतरिम राहत देती है तो गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लग सकती है, अन्यथा पुलिस को पूछताछ और आगे की कार्रवाई का अधिकार मिल सकता है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह भी देखा जाएगा कि जांच एजेंसी ने अब तक कौन-कौन से साक्ष्य एकत्र किए हैं और आरोपों का आधार क्या है। कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही निर्णय होगा।

प्रेस वार्ता में आरोपों से इनकार, पुलिस अधिकारी पर साजिश का आरोप

मंगलवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने अपने ऊपर लगे आरोपों को असत्य और प्रेरित बताया। उन्होंने प्रयागराज के अपर पुलिस आयुक्त अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन पर एक तस्वीर भी प्रदर्शित की, जिसमें अजय पाल शर्मा और Ashutosh Maharaj एक साथ दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर में अजय पाल शर्मा केक काटते नजर आ रहे हैं और आशुतोष महाराज उनके बगल में खड़े हैं।

शंकराचार्य का कहना है कि यह तस्वीर घटनाक्रम की पृष्ठभूमि को समझने में महत्वपूर्ण है और उनके विरुद्ध कार्रवाई पूर्वाग्रह से प्रेरित हो सकती है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। उनका कहना है कि जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव स्वीकार्य नहीं होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा

इस प्रकरण ने धार्मिक जगत, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एक ओर समर्थकों का कहना है कि यह प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर कई सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।

कानून के जानकारों का मत है कि ऐसे मामलों में न्यायिक संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आरोप सिद्ध होने तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता, लेकिन आरोपों की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है। यही कारण है कि अब सबकी नजरें उच्च न्यायालय की सुनवाई और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

आगे की राह

यदि अदालत से अग्रिम जमानत मिलती है तो शंकराचार्य को गिरफ्तारी से अस्थायी राहत मिल सकती है, साथ ही जांच में सहयोग की शर्तें तय की जा सकती हैं। यदि राहत नहीं मिलती, तो पुलिस पूछताछ और संभावित गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है। फिलहाल वाराणसी और प्रयागराज दोनों स्थानों पर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आने वाले दिनों में अदालत के आदेश तथा पुलिस की कार्रवाई इस प्रकरण की दिशा तय करेंगे। संवेदनशील आरोपों से जुड़ा यह घटनाक्रम कानून, धर्म और प्रशासन के बीच संतुलन की परीक्षा बन गया है।