विरोध प्रदर्शन की जांच में आठवीं गिरफ्तारी, पुलिस ने साजिश और प्रबंधन सहयोग का लगाया आरोप

नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Uday Bhanu Chib को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इस प्रकरण में अब तक कुल आठ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिससे स्पष्ट है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, समिट के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद तिलक मार्ग थाने में मामला दर्ज किया गया। शुरुआती कार्रवाई में उसी दिन चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और अन्य आरोपियों की तलाश शुरू की गई। सोमवार को पुलिस ने ग्वालियर से जितेंद्र यादव, राजा गुर्जर और अजय कुमार को भी गिरफ्तार किया। इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस की कार्रवाई का दायरा संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया।

उदय भानु चिब को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पूछताछ के उपरांत पुलिस ने उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया और पटियाला हाउस अदालत में पेश किया। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से सात दिन की पुलिस हिरासत की मांग की। पुलिस का कहना था कि चिब ने विरोध प्रदर्शन की साजिश रची और प्रदर्शनकारियों को आवश्यक प्रबंधन सहयोग उपलब्ध कराया। पुलिस के अनुसार, मामले की तह तक पहुंचने और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने के लिए विस्तृत पूछताछ जरूरी है।

हालांकि अदालत ने पुलिस की सात दिन की मांग को स्वीकार नहीं किया और चार दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की। अदालत के इस निर्णय के बाद अब जांच एजेंसियां निर्धारित अवधि के भीतर आरोपों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूत करने का प्रयास करेंगी।

बचाव पक्ष की दलील: दंगा जैसी स्थिति बताना अतिशयोक्ति

उदय भानु चिब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल न तो फरार थे और न ही जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे। वह दिल्ली में ही मौजूद थे और पुलिस के साथ सहयोग कर रहे थे। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि प्रदर्शन के दौरान कोई हथियार या लाठी का इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए इसे दंगा जैसी स्थिति बताना अनुचित है।

अधिवक्ता ने अदालत में यह भी सवाल उठाया कि जब देश में गंभीर अपराधों की घटनाएं सामने आती रहती हैं, ऐसे में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से बरामद टी-शर्ट को मुद्दा बनाना चिंताजनक है। बचाव पक्ष का कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसे साजिश का रूप देना उचित नहीं है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक कार्रवाई करार देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी संगठन से जुड़ी हो।

एआई इम्पैक्ट समिट जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षा इंतजामों के बावजूद प्रदर्शनकारियों का कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना और विरोध दर्ज कराना जांच का विषय बना हुआ है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शन की योजना कैसे बनाई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

आगे की जांच पर निगाहें

चार दिन की पुलिस हिरासत के दौरान जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, संचार रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि प्रदर्शन के लिए संसाधन कहां से जुटाए गए और क्या इसमें किसी बड़े स्तर की रणनीति शामिल थी।

दूसरी ओर, युवा कांग्रेस के समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक है और इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगामी दिनों में पुलिस की पूछताछ तथा अदालत में होने वाली अगली सुनवाई इस प्रकरण की दिशा तय करेगी। राजधानी में हुए इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गतिविधियों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।