पटना में उद्यमियों और शिक्षण संस्थान संचालकों से संवाद, संघ की भूमिका और शताब्दी वर्ष पर रखे विचार
संघ स्थापना के उद्देश्य पर सरसंघचालक का स्पष्ट संदेश
पटना, 27 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से हुआ था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्षों तक गहन विचार के बाद वर्ष 1925 में संघ कार्य की शुरुआत की थी। यह विचार मोहन भागवत ने पटना में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना किसी एक वर्ग या सीमित उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के दीर्घकालिक उत्थान के लिए की गई थी।
देश के उत्थान में संघ की रचनात्मक भूमिका
पटना के विजय निकेतन में उद्यमियों और शैक्षिक संस्थानों के संचालकों के साथ संवाद करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि संघ की स्थापना के समय देश में सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए अनेक रचनात्मक प्रयास चल रहे थे। उन सभी प्रयासों को समन्वित रूप से पूर्ण करने और समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य संघ ने अपने दायित्व के रूप में अपनाया। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज को आत्मनिर्भर, संगठित और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ बनाना रहा है।
समाज संगठन को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला
सरसंघचालक ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि जब समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। संघ का मूल उद्देश्य समाज में आत्मविश्वास, अनुशासन और सेवा भावना का विकास करना है। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज निर्माण पर केंद्रित है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत रही है।
चार दिवसीय बिहार प्रवास का विवरण
मोहन भागवत चार दिवसीय प्रवास पर बिहार आए हुए हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के क्रम में उन्होंने 25 और 26 जनवरी को उत्तर बिहार का दौरा किया। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुजफ्फरपुर में ध्वजारोहण किया। उसी दिन वे पटना पहुंचे और शाम को पटना के दायित्वधारी स्वयंसेवकों के साथ संगठनात्मक विषयों पर संवाद किया।
शताब्दी वर्ष में संघ गतिविधियों पर जोर
बातचीत के दौरान सरसंघचालक ने संघ शताब्दी वर्ष के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह वर्ष संघ के कार्यों की समीक्षा और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
अगले प्रवास के लिए प्रस्थान
कार्यक्रमों की श्रृंखला पूरी करने के बाद सरसंघचालक बुधवार सुबह पटना से अपने अगले प्रवास के लिए प्रस्थान करेंगे। उनके इस दौरे को संघ शताब्दी वर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संगठन के उद्देश्यों और समाज के प्रति उसकी भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया।
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