5 से 7 मार्च तक चलेगा वैश्विक रणनीतिक सम्मेलन, वैश्विक शक्ति संतुलन, जलवायु संकट और तकनीकी बदलाव जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली : भारत के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक सम्मेलनों में शामिल रायसीना डायलॉग का आज से औपचारिक आरंभ हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को इसके 11वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 5 मार्च से 7 मार्च तक तीन दिनों तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता, रणनीतिक विशेषज्ञ और शोधकर्ता वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच पर एकत्र होंगे।

इस वर्ष के रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वह इस अवसर पर उद्घाटन भाषण भी देंगे। इस सम्मेलन का आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और भारत के विदेश मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यह मंच वैश्विक रणनीतिक विमर्श का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

110 देशों के प्रतिनिधि ले रहे हैं हिस्सा

इस वर्ष के रायसीना डायलॉग में 110 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें विभिन्न देशों के मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, सांसद, राजनयिक और सैन्य अधिकारी शामिल हैं। सम्मेलन में लगभग 2700 प्रतिभागियों के प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की संभावना जताई गई है।

सम्मेलन की कार्यवाही को विश्व भर में डिजिटल मंचों के माध्यम से सीधे प्रसारित किया जाएगा, जिससे लाखों लोग इसे देख सकेंगे। आयोजकों का मानना है कि इस मंच के माध्यम से वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण और रणनीतिक सोच को नई दिशा मिलती है।

पिछले वर्षों में भी रायसीना डायलॉग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान बनाई है और इसे विश्व के प्रमुख रणनीतिक सम्मेलनों में गिना जाने लगा है। यही कारण है कि हर वर्ष इसमें भाग लेने वाले देशों और विशेषज्ञों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इस वर्ष की थीम : ‘संस्कार : दावा, समायोजन, उन्नति’

रायसीना डायलॉग 2026 की थीम ‘संस्कार : दावा, समायोजन, उन्नति’ रखी गई है। इस थीम के माध्यम से बदलती वैश्विक व्यवस्था में देशों की भूमिका, उनके हितों के संतुलन और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।

तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में छह प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा होगी। इनमें वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलाव, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियां, तकनीकी विकास का प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी जटिलताएं शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां पारंपरिक गठबंधन व्यवस्था में बदलाव दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही तकनीक आधारित वैश्विक शक्ति संरचना उभर रही है, जिसे कई विशेषज्ञ ‘टेक्नोपोलर’ विश्व व्यवस्था के रूप में देख रहे हैं। इसी संदर्भ में सम्मेलन में इस बदलते परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

कई देशों के विदेश मंत्री पहुंचे दिल्ली

रायसीना डायलॉग में भाग लेने के लिए कई देशों के प्रमुख प्रतिनिधि और विदेश मंत्री दिल्ली पहुंच चुके हैं। इनमें माल्टा के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इयान बोर्ग, भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपो डी एन ढुंग्येल और मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल शामिल हैं।

इसके अलावा सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फौरे और श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ भी इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। इन नेताओं की उपस्थिति से सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मंच देशों के बीच संवाद को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद मिलती है।

‘विकसित भारत 2047’ के विजन पर भी होगी चर्चा

सम्मेलन के अंतिम चरण में भारत के दीर्घकालिक विकास के रोडमैप पर भी चर्चा की जाएगी। इसमें ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।

यह दृष्टि भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से जुड़ी हुई है। सरकार का मानना है कि वैश्विक सहयोग, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुधारों के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

रायसीना डायलॉग के मंच पर इस विषय पर चर्चा से यह भी स्पष्ट होगा कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में किस प्रकार अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वैश्विक रणनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच

पिछले एक दशक में रायसीना डायलॉग ने वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यह मंच विभिन्न देशों के नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और रणनीतिक विशेषज्ञों को एक साथ लाकर जटिल वैश्विक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है।

भारत के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से देश अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि हर वर्ष यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!

राज्यसभा चुनाव : कांग्रेस ने 6 उम्मीदवारों की घोषणा की

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया राज्यसभा जाने का ऐलान

भारत बढ़ाएगा रक्षा क्षमता, 5,083 करोड़ में 6 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और मिसाइलें खरीदेगा भारत

दुबई से एयर इंडिया की पहली फ्लाइट पहुंची दिल्ली, 149 फंसे हुए यात्री घर लौटे