दो दशक से अधिक समय तक बिहार की राजनीति का नेतृत्व करने के बाद संसद के उच्च सदन में जाने की इच्छा जताई, कहा : जनता का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत
पटना : बिहार की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विराम लगा दिया। उन्होंने स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि वह इस बार राज्यसभा के चुनाव में उम्मीदवार बनने जा रहे हैं और इसके लिए शीघ्र ही नामांकन दाखिल करेंगे। यह घोषणा उन्होंने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर किए गए एक विस्तृत संदेश के माध्यम से की, जिसमें उन्होंने बिहार की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने राजनीतिक जीवन की यात्रा और भविष्य की दिशा के बारे में भी संकेत दिए।
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में लिखा कि पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर लगातार विश्वास और समर्थन बनाए रखा है। इसी विश्वास की ताकत पर उन्होंने राज्य और जनता की पूरी निष्ठा के साथ सेवा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जनता के इसी भरोसे के कारण बिहार ने विकास और सम्मान की दिशा में नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस विश्वास और समर्थन के लिए वह पहले भी कई बार जनता का आभार व्यक्त कर चुके हैं और आगे भी करते रहेंगे।
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 5, 2026
संसदीय जीवन की पुरानी इच्छा का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में अपने संसदीय जीवन की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था और संसद में प्रतिनिधित्व करना शुरू किया था, तभी से उनके मन में एक इच्छा थी कि वह बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनने का अनुभव प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि उसी क्रम में अब वह राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं।
नीतीश कुमार के इस बयान ने बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। लंबे समय से यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या वह राज्य की सक्रिय राजनीति में उसी भूमिका में बने रहेंगे या किसी नए राजनीतिक दायित्व की ओर कदम बढ़ाएंगे। अब उनके इस स्पष्ट ऐलान के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।
जनता से संबंध बने रहने का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा में जाने का निर्णय लेने के बावजूद उनका जनता से संबंध पहले की तरह ही बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वह पूरी ईमानदारी से यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि जनता के साथ उनका रिश्ता भविष्य में भी कायम रहेगा और वह बिहार के विकास के लिए पहले की तरह प्रतिबद्ध रहेंगे।
उन्होंने कहा कि एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पहले की तरह ही बना रहेगा और वह जनता के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य करते रहेंगे। उनके अनुसार, बिहार के विकास की जो यात्रा पिछले वर्षों में शुरू हुई है, उसे आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है और वह हर स्तर पर इसके लिए अपना योगदान देते रहेंगे।
नई सरकार को सहयोग और मार्गदर्शन देने की बात
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में यह भी कहा कि राज्य में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उनके इस कथन को बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वह राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में नेतृत्व की नई व्यवस्था सामने आ सकती है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में किसी राजनीतिक बदलाव का सीधा उल्लेख नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि राज्य के विकास और प्रशासनिक स्थिरता के लिए वह हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार रहेंगे।
थोड़ी देर में करेंगे नामांकन दाखिल
सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए जल्द ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे। बताया जा रहा है कि इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और कुछ ही समय में वह निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन प्रस्तुत करेंगे।
राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में उनकी उम्मीदवारी को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही थी, लेकिन अब स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा इसकी पुष्टि कर दिए जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि वह संसद के उच्च सदन में जाने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने जा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़
नीतीश कुमार का यह निर्णय बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पिछले कई वर्षों से वह राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में उन्होंने नेतृत्व की भूमिका निभाई है। ऐसे में उनका राज्यसभा की ओर रुख करना राजनीतिक परिदृश्य में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस फैसले का असर बिहार की सत्ता संरचना और राजनीतिक रणनीतियों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस ऐलान ने राज्य की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है और सभी की नजरें अब उनके नामांकन और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
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