बोडो विरासत के भव्य उत्सव में बोले प्रधानमंत्री, असम का बदला हुआ स्वरूप पूरे भारत की उपलब्धि

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, बोडो समुदाय की विरासत और राज्य में आए व्यापक सामाजिक-आर्थिक बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज का असम शांति, संस्कृति और प्रगति का सशक्त प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि कभी जिस धरती पर हिंसा, गोलियों की गूंज और कर्फ्यू का सन्नाटा पसरा रहता था, आज वहीं रंग-बिरंगे सांस्कृतिक उत्सव, लोकनृत्य और सामूहिक उल्लास दिखाई देता है। यह परिवर्तन केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की सामूहिक उपलब्धि है, जो लोकतंत्र, संवाद और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने की मिसाल पेश करती है।

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प्रधानमंत्री शनिवार शाम गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित बोडो समुदाय की विरासत से जुड़े भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बागुरुम्बा दोहो 2026’ में शामिल हुए। इस ऐतिहासिक आयोजन में बोडो समाज के दस हजार से अधिक कलाकारों ने एक साथ पारंपरिक बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक एकता और सामूहिक चेतना का अद्भुत दृश्य रचा। बागुरुम्बा नृत्य बोडो समुदाय की लोक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है, जो प्रकृति से प्रेरित है। यह नृत्य खिलते फूलों, हरियाली और मानव जीवन व प्राकृतिक जगत के बीच सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने इस प्रस्तुति को असम की जीवंत संस्कृति का उत्सव बताया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने असम के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए कहा कि यह वही राज्य है, जहां कभी लंबे समय तक अशांति, अलगाव और भय का माहौल बना रहा। उन्होंने कहा कि पहले यहां की पहचान हिंसा और अस्थिरता से जोड़ी जाती थी, लेकिन आज असम अपनी कला, संस्कृति, खेल और विकास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने इस बदलाव को सरकार, समाज और युवाओं के साझा प्रयासों का परिणाम बताया।

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प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि असम की कला, संस्कृति और विकास से कुछ लोगों को तकलीफ होती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए असम में अस्थिरता को बढ़ावा दिया, समस्याओं के समाधान के बजाय विभाजन को हवा दी और संवाद के रास्ते बंद किए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में विदेशी घुसपैठ को बढ़ावा मिला, जिससे असम की जमीन, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज असम जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, वह इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियों और ईमानदार प्रयासों से दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज असम का आत्मविश्वास, सामर्थ्य और प्रगति भारत की विकास गाथा को नई ऊर्जा दे रही है। असम अब तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बोडोलैंड क्षेत्र और वहां के लोगों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बोडो समाज ने शांति और विकास के रास्ते को अपनाकर पूरे देश को सकारात्मक संदेश दिया है।

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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें वर्षों से असम की संस्कृति और बोडो परंपराओं को नजदीक से देखने का अवसर मिला है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री के रूप में वे जितनी बार असम आए हैं, उतनी बार पहले कोई अन्य प्रधानमंत्री नहीं आया। उनका निरंतर प्रयास रहा है कि असम की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को देश-दुनिया में व्यापक मंच मिले। इसी दिशा में बिहू से जुड़े भव्य आयोजन, दिल्ली में आयोजित बोडोलैंड महोत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए, जिनसे असम की पहचान राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘बागुरुम्बा दोहो’ केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महान बोडो परंपरा को सम्मान देने और समाज की विभूतियों को स्मरण करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार असम की हर विरासत, हर परंपरा और हर गौरव का सम्मान करना अपना सौभाग्य मानती है। इस अवसर पर उन्होंने असम के महान सांस्कृतिक व्यक्तित्व ज्योति प्रसाद अग्रवाला की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों ने असम की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी।

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प्रधानमंत्री ने असम के बदले हुए स्वरूप पर गर्व व्यक्त करते हुए 2020 में हुए बोडो शांति समझौते का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते ने दशकों से चले आ रहे संघर्ष पर विराम लगाया और समाज में विश्वास की बहाली का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद हजारों युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों को अपनाया। आज बोडो समाज के प्रतिभाशाली युवा न केवल असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं, बल्कि खेल और अन्य क्षेत्रों में भी देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि असम का वर्तमान स्वरूप उन्हें गर्व से भर देता है, क्योंकि यह दिखाता है कि शांति, संवाद और विकास के रास्ते पर चलकर किसी भी क्षेत्र को नई पहचान दी जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में असम न केवल पूर्वोत्तर, बल्कि पूरे भारत के लिए सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति का प्रेरणास्रोत बनेगा।

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