तनावपूर्ण हालात से निकलकर भारत पहुंचे नागरिकों ने सरकार और दूतावास का जताया आभार
नई दिल्ली: ईरान में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच शनिवार तड़के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भावुक और राहत भरे दृश्य देखने को मिले। जैसे ही ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों का विमान दिल्ली पहुंचा, आगमन टर्मिनल के बाहर इंतजार कर रहे परिजन अपने अपनों से लिपट पड़े। किसी की आंखों में आंसू थे तो किसी के चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान। लंबे समय से तनाव, डर और अनिश्चितता में जी रहे परिवारों के लिए यह पल बेहद भावुक था। शुक्रवार रात से ही एयरपोर्ट के बाहर परिजनों की भीड़ जमा थी और हर आने वाले यात्री समूह को उम्मीद भरी नजरों से देखा जा रहा था कि शायद अगला चेहरा उनका अपना हो।
तनाव, डर और अनिश्चितता के बीच बीते दिन
ईरान से लौटे कई छात्रों और नागरिकों ने वहां के हालात को अत्यंत तनावपूर्ण बताया। छात्रों के अनुसार सड़कों पर असहज माहौल था और सुरक्षा को लेकर लगातार आशंका बनी हुई थी। सबसे बड़ी परेशानी इंटरनेट सेवाओं का बंद होना रहा, जिससे वे अपने परिवारों और भारत में मौजूद परिचितों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। एक छात्रा ने बताया कि इंटरनेट बंद होने के कारण उन्हें यह भी नहीं पता चल पा रहा था कि देश के अन्य हिस्सों में क्या स्थिति है। इस अलग-थलग स्थिति ने मानसिक दबाव और बढ़ा दिया था।
परिवार से मिलते ही टूटा तनाव का बांध
भारत पहुंचते ही जैसे ही यात्रियों ने अपने परिजनों को सामने देखा, लंबे समय से दबा तनाव आंसुओं के रूप में बाहर आ गया। एक पिता ने अपनी बेटी को सीने से लगाते हुए कहा कि अब जाकर चैन की सांस ली है। कई माताएं अपने बच्चों को देखकर भावुक हो उठीं। यात्रियों ने माना कि घर लौटकर परिवार के बीच आना उनके लिए सबसे बड़ी राहत है। ईरान में पढ़ाई कर रहे एक छात्र शाजिद ने बताया कि अनिश्चित हालात और संचार की कमी ने उन्हें और उनके परिवार को लगातार चिंता में रखा, लेकिन यात्रा व्यवस्था की जानकारी मिलते ही उम्मीद जगी और अब घर लौटकर सुकून मिला है।
छात्रों ने साझा किए ईरान के हालात
शिराज के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने बताया कि इंटरनेट बंद होने के कारण देशभर की स्थिति की सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। हालांकि उनके शहर में हालात अपेक्षाकृत ठीक थे, लेकिन चारों ओर फैली खबरों और अफवाहों से डर का माहौल बना हुआ था। उन्होंने बताया कि वे वाणिज्यिक उड़ान से अपने स्तर पर भारत लौटी हैं। अन्य छात्रों ने भी माना कि हालात तेजी से बदल रहे थे और भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ था।
भारतीय दूतावास की भूमिका से मिली राहत
परिजनों ने बताया कि इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान उनकी चिंता चरम पर पहुंच गई थी। कई दिनों तक बच्चों से संपर्क न हो पाने के कारण परिवारों की रातों की नींद उड़ गई थी। बाद में जब भारतीय दूतावास की ओर से संपर्क बहाल किया गया और मदद शुरू हुई, तब जाकर कुछ राहत मिली। यात्रियों ने बताया कि दूतावास की ओर से लगातार मार्गदर्शन और आवश्यक सूचनाएं दी गईं, जिससे सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।
सरकार की पहल की सराहना
ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने केंद्र सरकार के कदम की खुलकर सराहना की और आभार व्यक्त किया। एक यात्री ने वहां के हालात को बेहद खराब बताते हुए कहा कि स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और दूतावास ने हमें जल्द से जल्द वहां से निकालने में बहुत सहयोग किया। हमें बताया गया कि कैसे और कब निकलना है। सच में, मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है। एक अन्य यात्री ने भी कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में हालात काफी भयानक हो गए थे और सुरक्षित निकासी उनके लिए जीवनदान जैसा रहा।
विदेश मंत्रालय की सलाह और आगे की रणनीति
विदेश मंत्रालय के अनुसार ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने सामान्य स्थिति बहाल होने तक ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद भारतीयों को उपलब्ध साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी है। मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है।
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