प्रधानमंत्री की स्वीकृति के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान, देश के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली: देश के परिवहन ढांचे को नई गति देने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए प्रधानमंत्री की स्वीकृति से 7 नए उच्च गति यात्री रेल गलियारों को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना लगभग 4000 किलोमीटर क्षेत्र में फैलेगी और इस पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह पहल भारत की आर्थिक प्रगति, क्षेत्रीय संपर्क और रोजगार सृजन के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

रेल मंत्री के अनुसार, इन उच्च गति गलियारों के निर्माण से देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक केंद्रों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार और उद्योग को भी नई ऊर्जा मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि भारत को विश्व स्तरीय उच्च गति रेल नेटवर्क से जोड़ा जाए, जिससे आधुनिक परिवहन प्रणाली विकसित हो सके।

4000 किलोमीटर में फैला होगा नेटवर्क

प्रस्तावित 7 उच्च गति यात्री गलियारे लगभग 4000 किलोमीटर तक विस्तारित होंगे। इन गलियारों को देश के विभिन्न आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन और व्यवहार्यता अध्ययन के बाद निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा।

इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली, सुरक्षित पटरियां, आधुनिक स्टेशन ढांचा और उच्च क्षमता वाली ट्रेनें शामिल होंगी। उच्च गति रेल प्रणाली से यात्रा समय में 40 से 60 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है। इससे सड़क और हवाई यातायात पर भी दबाव कम होगा।

16 लाख करोड़ रुपये का निवेश

करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ यह परियोजना देश की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा पहलों में से एक मानी जा रही है। इस निवेश में पटरियों का निर्माण, भूमि अधिग्रहण, स्टेशन आधुनिकीकरण, तकनीकी उपकरण और सुरक्षा तंत्र शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना से निर्माण, इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्रों में व्यापक रोजगार सृजन होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च गति रेल परियोजनाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसर उत्पन्न करती हैं। साथ ही इससे स्थानीय उद्योगों, इस्पात, सीमेंट और मशीनरी निर्माण जैसे क्षेत्रों को भी लाभ मिलता है।

आत्मनिर्भर भारत और आधुनिक परिवहन की दिशा

रेल मंत्री ने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी। सरकार की योजना है कि परियोजना में अधिकतम स्वदेशी तकनीक और निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाए। इससे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च गति रेल केवल बड़े शहरों को जोड़ने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके माध्यम से मध्यम और छोटे शहरों को भी राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

आर्थिक विकास को मिलेगी रफ्तार

विश्लेषकों का मानना है कि उच्च गति रेल गलियारों से पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। तेज और विश्वसनीय यात्रा विकल्प से उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में सुविधा होगी। इससे देश की समग्र उत्पादकता में वृद्धि होने की संभावना है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। उच्च गति रेल नेटवर्क विकसित होने से भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा, जहां आधुनिक और तेज रेल प्रणाली उपलब्ध है।

आगे की प्रक्रिया

आगामी चरण में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, पर्यावरणीय स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि निर्धारित समयसीमा में परियोजना को साकार किया जा सके।

रेल मंत्री ने विश्वास जताया कि इन 7 नए उच्च गति यात्री गलियारों से देश के परिवहन तंत्र में ऐतिहासिक बदलाव आएगा और आने वाले वर्षों में भारत का रेल नेटवर्क विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप होगा। यह परियोजना न केवल गति का प्रतीक बनेगी, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति और तकनीकी क्षमता का भी प्रदर्शन करेगी।

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