दुबई और आबू धाबी में गिरे मलबे से आग व नुकसान, तीन विदेशी नागरिकों की मौत, दर्जनों घायल

आबू धाबी, 03 मार्च: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच मंगलवार को तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब तक कुल 174 बैलिस्टिक मिसाइलें और 689 ड्रोन को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि अधिकांश प्रक्षेपास्त्र और मानवरहित विमान वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोके गए, जबकि कुछ समुद्र में गिरे और कुछ के अवशेष देश की सीमा के भीतर गिरे।

वायु रक्षा प्रणाली की व्यापक कार्रवाई

यूएई के रक्षा मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 161 बैलिस्टिक मिसाइलें, 8 क्रूज मिसाइलें और 645 ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया गया। शेष कुछ उपकरण बिना बड़े नुकसान के समुद्र या निर्जन क्षेत्रों में गिरे। अधिकारियों का कहना है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने उच्च सतर्कता और समन्वय के साथ काम किया, जिससे बड़े पैमाने पर संभावित क्षति टल गई।

हालांकि अधिकांश हमले विफल कर दिए गए, लेकिन दुबई के पाम जुमैराह और बुर्ज अल अरब के आसपास गिरते मलबे से आग लगने और सीमित नुकसान की खबरें मिली हैं। आबू धाबी के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में भी मलबा गिरने से आग भड़कने की सूचना है, जिसे आपात सेवाओं ने नियंत्रित कर लिया।

जान-माल का नुकसान

यूएई अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है। मृतकों में एक पाकिस्तानी, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा देशभर में लगभग 58 लोग घायल हुए हैं, जिनमें भारतीय सहित कई अन्य देशों के नागरिक भी शामिल हैं। अधिकांश घायलों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सक्रिय हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कूटनीतिक प्रतिक्रिया और दूतावास बंद

हमलों के बाद यूएई के रक्षा और विदेश मंत्रालयों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला अपमान बताया। बढ़ते तनाव के बीच यूएई ने तेहरान स्थित अपने दूतावास को बंद करने और राजनयिक कर्मचारियों को वापस बुलाने की घोषणा की है। यह कदम क्षेत्रीय संबंधों में गंभीर गिरावट का संकेत माना जा रहा है।

व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव

यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने इसे प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया, जिसमें खाड़ी के करीब के देशों के हवाई ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। हालांकि यूएई की वायु रक्षा प्रणाली ने बड़े हमले को विफल कर दिया, लेकिन इस घटना ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है।

खाड़ी के अन्य देशों जैसे कतर, बहरीन और कुवैत से भी मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। कई हवाई अड्डों पर उड़ान सेवाएं प्रभावित हुई हैं और कुछ हवाई मार्गों को अस्थायी रूप से बंद या परिवर्तित किया गया है। वाणिज्यिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

सरकार की अपील और सुरक्षा इंतजाम

यूएई सरकार ने जनता से संयम बनाए रखने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है। अफवाहों से बचने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश में सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में है और सभी संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पश्चिम एशिया में यह ताजा घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बना रहा तो क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। फिलहाल यूएई की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की रक्षा सुनिश्चित करना है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस संकट के अगले कदम पर टिकी हैं।

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