नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारत में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर फिलहाल किसी तरह का संकट नहीं है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देश के पास इस समय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 25 करोड़ बैरल से ज्यादा का भंडार मौजूद है, जो करीब 4 हजार करोड़ लीटर के बराबर है।
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रिपोर्ट के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए, तो भी देश की सप्लाई चेन लगभग 7 से 8 सप्ताह तक बिना किसी बड़ी परेशानी के चल सकती है। ऐसे में निकट भविष्य में petrol, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कमी की आशंका नहीं है।
सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत के पास केवल 25 दिन का ही तेल भंडार बचा है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा अब किसी एक देश या मार्ग पर निर्भर नहीं रही है।
तेल आयात के स्रोत बढ़ाए
पिछले एक दशक में भारत ने तेल आयात के स्रोतों में उल्लेखनीय विस्तार किया है। पहले भारत करीब 27 देशों से crude oil खरीदता था, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 40 देशों तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा खरीद की नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटी
दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अक्सर वैश्विक चिंता बनी रहती है। हालांकि भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए इस मार्ग पर निर्भरता कम कर दी है। अब देश का केवल करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल ही इस रास्ते से आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत तेल रूस, अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका और मध्य एशिया जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात किया जाता है।
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रूस से तेल खरीदने की अनुमति
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष लाइसेंस दिया है, जो 3 अप्रैल तक मान्य रहेगा। इससे भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने में सुविधा मिलेगी और सप्लाई बाधित होने की संभावना काफी कम हो जाएगी।
चार साल से स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में केवल 0.67 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत इसी अवधि में पाकिस्तान में पेट्रोल 55 प्रतिशत और जर्मनी में 22 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है।
तेल कंपनियों ने उठाया भारी बोझ
सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने बड़ा आर्थिक भार उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल-डीजल पर लगभग 24,500 करोड़ रुपये और एलपीजी पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान कंपनियों ने खुद वहन किया, ताकि खुदरा कीमतें स्थिर रह सकें।
एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा
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हालांकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब 913 रुपये में मिल रहा है, जो पहले 853 रुपये था। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपये की वृद्धि हुई है और इसकी कीमत अब 1883 रुपये हो गई है। नई दरें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं।
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