लोकसभा में सोमवार राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के मौके पर संसद में विपक्ष की ओर से बोल रहे राहुल गांधी के भाषण के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। राहुल ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब का हवाला देते हुए कहा- डोकलाम में 4 चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे।
राहुल के ऐसा कहते ही पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फिर गृह मंत्री शाह ने उन्हें टोका। इसके बाद स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें रोका।
राहुल करीब 46 मिनट तक अपनी बात कहने की कोशिश करते रहे। इसके बाद स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
- राहुल गांधीने सदन में कहा, डोकलाम में चीनी टैंक भारत की सीमा में पहुंच गए थे। मैं यह बात एक मैगजीन के आर्टिकल के हवाले से कह रहा हूं। जिसमें पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की किताब (मेमॉयर) को कोट किया गया है।
- राजनाथ सिंहखड़े हुए और बोले, 'अगर ये बातें प्रकाशित हुई हैं तो इसका जिक्र करें नहीं तो छोड़ दें।'
- राहुलबोले- ‘आप सब ध्यान से सुनें कि मैं क्या पढ़ रहा हूं इससे पता चल जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं। 4 चीनी टैंक डोकलाम में भारत की धरती पर आ रहे थे। वे कुछ 100 मीटर ही दूर थे।’
- स्पीकर ओम बिरलाने कहा,राहुल जी आप सदन में नेता विपक्ष हैं। सांसद प्रियंका ने एक बात कही थी तो उन्होंने ऑथेंटिक स्तर पर प्रस्तुत किया था। आपसे भी यही अपील है'
- राहुलने कहा, 'ये सौ प्रतिशत ऑथेंटिक है। राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल बताएं कि क्या यह प्रकाशित हुआ है या नहीं केवल इतना बताएं।' लोकसभा में एनडीए और विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।
- ओम बिरलाने कहा कि रक्षामंत्री सही कह रहे हैं। आप सदन में इसका जवाब दें। आप सदन में है, विपक्ष के नेता हैं सही नियम से चलें।
- राहुलने कहा- नरवणे की किताब में रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री का जिक्र है। मैं वही बता रहा हूं।
- राजनाथ सिंहने कहा कि राहुल जिस किताब के बारे में बोल रहे हैं वह किताब प्रकाशित नहीं हुई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आपत्ति जताई, क्योंकि उन्होंने सदन में एक पब्लिश्ड मैगज़ीन की कहानी के कोट्स का हवाला दिया, जो सदन के नियमों के खिलाफ है। राहुल गांधी का कहना है कि उनका सोर्स भरोसेमंद है और इसमें एक पूर्व आर्मी जनरल के अप्रकाशित… pic.twitter.com/Hf0GLVBWyc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 2, 2026
नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी', पब्लिश नहीं हुई
राहुल गांधी संसद में जिस किताब के आधार पर डोकलाम में चीनी टैंक घुसने का दावा कर रहे हैं, वह पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने लिखी है। 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' नामक यह किताब अभी पब्लिश नहीं हुई है। इसका हार्डकवर अप्रैल 2024 से ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर उपलब्ध है। किताब में चीन के साथ भारतीय सेना की 2020 की झड़पों के साथ-साथ अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है।
2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे नरवणे ने इंडियन एक्सप्रेस के इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पेंग्विन पब्लिशर ग्रुप को छपने के लिए दे दी है। अब यह प्रकाशन समूह और सरकार के बीच का मामला है।
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लोकसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, "स्पीकर ने फैसला दिया है कि मैगज़ीन या अखबारों के आर्टिकल को सदन में कोट नहीं किया जा सकता... सदन में बहस कानूनों के हिसाब से होनी चाहिए।" https://t.co/mYqWGxBC5Zpic.twitter.com/wgsN0x4xT3
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 2, 2026
लोकसभा और राज्यसभा में तीन दिन तक चलेगी बहस, धन्यवाद प्रस्ताव पर तय समय में रखे जाएंगे सरकार और विपक्ष के तर्क
नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में आज से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर व्यापक चर्चा की शुरुआत हो गई है। इस चर्चा को संसद के मौजूदा सत्र की सबसे महत्वपूर्ण बहसों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सरकार बीते वर्ष के कार्यों, नीतिगत प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं पर अपना पक्ष रखती है, जबकि विपक्ष इन्हीं बिंदुओं पर सरकार से जवाबदेही तय करने की कोशिश करता है। इस चर्चा का समापन चार फरवरी को होगा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा में सरकार की ओर से विस्तृत उत्तर देंगे।
LIVE: President Droupadi Murmu addresses the Parliament https://t.co/Fa7y5xNsxO
— President of India (@rashtrapatibhvn) January 28, 2026
राहुल गंधी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियमों का हवाला दे कर रोका
राहुल गांधी ने चीन मुद्दे पर सरकार पर हमला करने के लिए पूर्व सेना प्रमुख के अप्रकाशित संस्मरणों का हवाला दिया, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियम पढ़ते हुए कहा कि सत्र की चर्चा से असंबंधित किसी भी पुस्तक या समाचार पत्र से कुछ भी नहीं पढ़ा जा सकता है।
VIDEO | Parliament budget session: As Rahul Gandhi quotes from the former army chief’s unpublished memoirs to attack the government on the China issue, Lok Sabha Speaker Om Birla reads out the rules, saying that nothing from a book or newspaper that has no relevance to the… pic.twitter.com/ypBJWl5OOg
— Press Trust of India (@PTI_News) February 2, 2026
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की संवैधानिक परंपरा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा भारतीय संसदीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राष्ट्रपति द्वारा संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण को सरकार की नीति और दृष्टिकोण का आधिकारिक दस्तावेज माना जाता है। इसी अभिभाषण के आधार पर संसद में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जाता है और उस पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष आमने-सामने होते हैं। इस बार भी यह चर्चा खास मानी जा रही है, क्योंकि यह नए बजट और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में हो रही है।
तीन दिन की चर्चा, 18 घंटे का समय निर्धारित
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर कुल तीन दिनों तक चर्चा होगी। इस चर्चा के लिए संसद में कुल 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, ताकि सभी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि चर्चा गंभीर, तथ्यपरक और रचनात्मक हो, जिससे जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद हो सके।
लोकसभा में आज धन्यवाद प्रस्ताव दिया
लोकसभा में आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा पेश किया गाय। इस प्रस्ताव का समर्थन सांसद तेजस्वी सूर्या ने किया। इसके बाद सदन में चर्चा की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण में उठाए गए मुद्दों पर अपने विचार रखे। सत्तापक्ष जहां सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं विपक्ष इन्हीं बिंदुओं पर सवाल उटाए।
चार फरवरी को प्रधानमंत्री देंगे सरकार का जवाब
चार फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में इस पूरी चर्चा का जवाब देंगे। परंपरा के अनुसार, प्रधानमंत्री का उत्तर सरकार का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण वक्तव्य माना जाता है, जिसमें वे विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और आरोपों का जवाब देते हैं। इसके साथ ही वे राष्ट्रपति के अभिभाषण में उल्लिखित नीतियों और लक्ष्यों को दोहराते हुए सरकार की दिशा स्पष्ट करते हैं। राजनीतिक दृष्टि से प्रधानमंत्री का यह भाषण सत्र का एक प्रमुख आकर्षण होता है, जिस पर पूरे देश की नजर रहती है।
संसद के दोनों सदनों में समानांतर चर्चा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राज्यसभा में भी समानांतर रूप से बहस होगी। दोनों सदनों में उठाए गए मुद्दों और बहस के स्वर से यह संकेत मिलेगा कि सरकार और विपक्ष किन विषयों को लेकर सबसे अधिक सक्रिय हैं। राज्यसभा में जहां विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य क्षेत्रीय मुद्दों को सामने ला सकते हैं, वहीं लोकसभा में राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर अधिक जोर रहने की संभावना है।
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