अमृत काल में गुमनाम नायकों को मिल रहा सम्मान, भाईजी का जीवन साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा: सिंधिया
भोपाल: केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार शाम भोपाल में स्वतंत्रता संग्राम के निडर सेनानी एवं आयुर्वेद भूषण स्वर्गीय पं. उद्धवदास मेहता ‘भाईजी’ की स्मृति में समर्पित विशेष स्मारक डाक टिकट का विमोचन किया। यह कार्यक्रम न केवल एक डाक टिकट के जारी होने का अवसर था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उन सशक्त अध्यायों को याद करने का मंच भी बना, जिनमें कलम और विचार को हथियार बनाकर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि भाईजी का जीवन साहस, वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्रभक्ति का ऐसा उदाहरण है, जिसने दमनकारी शासन के सामने झुकने के बजाय जनता की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक डाक टिकट आने वाली पीढ़ियों तक भाईजी के विचारों और संघर्ष की गाथा पहुंचाने का संकल्प है, ताकि युवा पीढ़ी यह समझ सके कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष से नहीं, बल्कि निरंतर जागरूकता और साहस से सुरक्षित रहती है।
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सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज अमृत काल से शताब्दी काल की ओर अग्रसर है। इस कालखंड में देश उन गुमनाम नायकों को उनका उचित स्थान दे रहा है, जिनकी भूमिका स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रही, लेकिन समय के साथ वे इतिहास के हाशिये पर चले गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत 2047 केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। भाईजी जैसे नायकों का सम्मान करके देश अपनी जड़ों से जुड़ता है और भविष्य की दिशा तय करता है।
अपने संबोधन में सिंधिया ने पं. उद्धवदास मेहता ‘भाईजी’ के जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1934 में भोपाल रियासत के नवाबी शासन के दौरान जब जनता पर करों का बोझ बढ़ाया जा रहा था और अधिकारों का दमन हो रहा था, तब भाईजी ने ‘प्रजा पुकार’ नामक पत्रिका के माध्यम से जनता की पीड़ा को स्वर दिया। यह पत्रिका केवल एक समाचार माध्यम नहीं थी, बल्कि जनचेतना का ऐसा मंच थी, जिसने शासन की मनमानी नीतियों को बेनकाब किया और आम नागरिकों में अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की।
सिंधिया ने कहा कि भाईजी ने सत्ता के प्रलोभनों को ठुकराकर सत्य और न्याय का मार्ग चुना। ‘प्रजा पुकार’ के प्रकाशन और प्रजा मंडल आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा, जहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। उनका संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का परिणाम होती है।
स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी भाईजी का योगदान सीमित नहीं हुआ। उन्होंने भारतीय जनसंघ के प्रारंभिक स्तंभों में रहते हुए राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करने का कार्य किया। सिंधिया ने कहा कि भाईजी का जीवन स्वाभिमान, राष्ट्रसेवा और त्याग का जीवंत प्रतीक है, जिसे आज का समाज स्मरण कर आत्मसात कर सकता है। ऐसे व्यक्तित्वों का सम्मान करके ही लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होती हैं।
भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी इस विशेष स्मारक डाक टिकट में भाईजी की तस्वीर के साथ ‘प्रजा पुकार’ का प्रतीक और उनके योगदान का संक्षिप्त उल्लेख किया गया है। यह डाक टिकट न केवल संग्रहकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि शैक्षणिक दृष्टि से भी उपयोगी है, क्योंकि इसके माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के स्थानीय और क्षेत्रीय नायकों की भूमिका को राष्ट्रीय पटल पर स्थान मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान सिंधिया ने उपस्थित नागरिकों से आह्वान किया कि विकसित भारत के इस महायज्ञ में प्रत्येक व्यक्ति सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन इस प्रगति की नींव उन बलिदानों पर टिकी है, जो भाईजी जैसे नायकों ने दिए। उनकी स्मृति हमें यह सिखाती है कि राष्ट्रसेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती और सत्य की राह पर चलने वाला व्यक्ति इतिहास में अमर हो जाता है।
इस अवसर पर मध्य प्रांत संघचालक अशोक पांडे, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में भाईजी के संघर्ष और योगदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण राष्ट्रभक्ति, इतिहासबोध और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से ओतप्रोत रहा, जिसने यह संदेश दिया कि अमृत काल में भारत अपनी विरासत को सम्मान देकर भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।
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