बोर्ड परीक्षाओं से पहले संवाद का नौंवा संस्करण: तनावमुक्त परीक्षा, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, 07 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से पहले आयोजित होने वाले बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा को लेकर देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने देश के एग्जाम वॉरियर्स से आग्रह किया है कि वे अपने प्रश्नों के साथ-साथ अपने अनुभव, विचार और सुझाव साझा करें, ताकि यह संवाद अधिक सार्थक, जीवंत और छात्रों के वास्तविक जीवन से जुड़ा बन सके।

प्रधानमंत्री का यह वार्षिक संवाद कार्यक्रम बोर्ड परीक्षाओं के दबाव और तनाव के बीच छात्रों को मानसिक संबल देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जाता है। इस वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ का यह नौंवा संस्करण होगा, जिसका आयोजन जनवरी माह में किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों से भी परीक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर खुलकर संवाद करना चाहते हैं, क्योंकि शिक्षा की यात्रा में इन तीनों की भूमिका समान रूप से अहम है।

सोशल मीडिया के माध्यम से संवाद का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संदेश साझा करते हुए कहा कि इस बार ‘परीक्षा पे चर्चा’ का मुख्य उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना, छात्रों को शांत और आत्मविश्वासी बनाए रखना तथा सकारात्मक मानसिकता के साथ परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि परीक्षाएं जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं और इन्हें किसी बोझ या डर के रूप में नहीं, बल्कि सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल सवाल ही न भेजें, बल्कि अपनी तैयारी के अनुभव, चुनौतियों और उनसे मिले सबक भी साझा करें। उनका मानना है कि छात्रों के वास्तविक अनुभव अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं और यही ‘परीक्षा पे चर्चा’ को एकतरफा भाषण के बजाय जीवंत संवाद में बदल देता है।

छात्रों के अनुभवों से मजबूत होता है संवाद
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर छात्र की कहानी अलग होती है। कोई समय प्रबंधन से जूझता है, तो कोई परीक्षा के डर से। ऐसे में जब छात्र अपने अनुभव साझा करते हैं, तो अन्य विद्यार्थियों को यह एहसास होता है कि वे अकेले नहीं हैं। यही भावना आपसी सहयोग और आत्मविश्वास को जन्म देती है। प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाने के तरीके बताना नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन के बड़े लक्ष्यों के लिए मानसिक रूप से तैयार करना भी है।

अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कई बार अनजाने में अभिभावकों की अपेक्षाएं बच्चों पर अतिरिक्त दबाव बना देती हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों का मनोबल बढ़ाएं, उनकी तुलना दूसरों से न करें और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर दें।

इसी तरह शिक्षकों से भी अपेक्षा की गई है कि वे छात्रों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन कौशल, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का भी पाठ पढ़ाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक यदि छात्रों के मन की बात समझें और उन्हें प्रोत्साहित करें, तो परीक्षा का डर अपने आप कम हो जाता है।

शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहल
उल्लेखनीय है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ शिक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसका आयोजन हर वर्ष बोर्ड परीक्षाओं से पहले किया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री सीधे छात्रों से संवाद करते हैं और उन्हें परीक्षा के तनाव से निपटने, समय प्रबंधन, एकाग्रता, लक्ष्य निर्धारण और जीवन मूल्यों पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

वर्ष 2026 में भी इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित छात्र, शिक्षक और अभिभावक भाग लेंगे। कार्यक्रम का प्रसारण विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इससे जुड़ सकें।

पिछले संस्करणों की व्यापक पहुंच
पिछले वर्षों में ‘परीक्षा पे चर्चा’ को देश-विदेश के लाखों छात्रों ने लाइव और डिजिटल माध्यमों से देखा और सुना है। इस कार्यक्रम ने धीरे-धीरे एक ऐसे मंच का रूप ले लिया है, जहां छात्र न केवल अपने सवाल पूछते हैं, बल्कि प्रेरणा भी प्राप्त करते हैं। कई छात्रों ने यह स्वीकार किया है कि इस संवाद ने उन्हें परीक्षा के डर से उबरने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद की है।

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य परीक्षा को भय का कारण नहीं, बल्कि सीख और आत्मविकास की प्रक्रिया के रूप में स्थापित करना है। प्रधानमंत्री का मानना है कि यदि छात्र मानसिक रूप से मजबूत होंगे, तो वे न केवल परीक्षा में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

देशभर के एग्जाम वॉरियर्स से अपील
प्रधानमंत्री ने अंत में देशभर के एग्जाम वॉरियर्स से अपील की कि वे इस संवाद में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपने विचार साझा करें। उनका कहना है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ तभी सफल होगी, जब इसमें छात्रों की वास्तविक आवाज और अनुभव शामिल होंगे। इस पहल के माध्यम से प्रधानमंत्री एक बार फिर यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार और समाज छात्रों के साथ खड़ा है और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।

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