वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में दर्शन, पूजा-अर्चना और विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन प्रसाद वितरण

मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को वृंदावन स्थित भव्य वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज के कल्याण, शांति और सद्भाव की मंगलकामना की। सरसंघचालक का यह दौरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सेवा और संस्कार के व्यापक संदेश के साथ जुड़ा दिखाई दिया।

चंद्रोदय मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं और सेवाभाव से जुड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ यानी इस्कॉन ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और भगवद्गीता के शाश्वत संदेश को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इस महान कार्य के पीछे संस्थापकाचार्य अभय चरणारविंद भक्तिवेदांत का जीवन और तपस्या मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।

श्रील प्रभुपाद का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा

सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि श्रील प्रभुपाद ने अपने संपूर्ण जीवन को मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने भारतीय दर्शन, सनातन परंपरा और भगवद्गीता के सार्वभौमिक विचारों को केवल भारत तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें वैश्विक चेतना का हिस्सा बनाया। भागवत ने कहा कि श्रील प्रभुपाद का कार्य यह सिद्ध करता है कि भारतीय संस्कृति में न केवल आध्यात्मिक गहराई है, बल्कि वह संपूर्ण विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता भी रखती है।

विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन प्रसाद वितरित किया

इस अवसर पर मोहन भागवत ने अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा पोषित विद्यालयों के छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से मध्याह्न भोजन प्रसाद भी वितरित किया। बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और सेवा के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा संस्कारों से जुड़ती है, तब समाज का भविष्य मजबूत और सशक्त बनता है।

धार्मिक गतिविधि से आगे सामाजिक दायित्व

सरसंघचालक ने कहा कि संघ और चंद्रोदय मंदिर से जुड़े भक्तों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य व्यक्तित्व निर्माण, सेवा कार्य, संस्कारयुक्त शिक्षा और सामाजिक समरसता के माध्यम से भारत को पुनः विश्व का आध्यात्मिक मार्गदर्शक बनाना है। उन्होंने कहा कि सेवा और भक्ति जब साथ चलती हैं, तभी समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

श्रील प्रभुपाद के विग्रह पर पुष्पांजलि

चंद्रोदय मंदिर के जनसंपर्क प्रमुख भरतर्षभा दास ने बताया कि दर्शन के उपरांत सरसंघचालक ने श्रील प्रभुपाद के विग्रह पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मंदिर प्रबंधन ने उन्हें श्रील प्रभुपाद द्वारा रचित भगवद्गीता यथारूप के विभिन्न संस्करणों का अवलोकन कराया, जो अनेक भाषाओं में प्रकाशित होकर विश्वभर में पढ़े जा रहे हैं।

निर्माणाधीन चंद्रोदय मंदिर की भव्यता

इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के चेयरमैन मधु पंडित दास और अध्यक्ष चंचलापति दास ने सरसंघचालक को निर्माणाधीन वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के प्रतिरूप का अवलोकन कराया। अध्यक्ष चंचलापति दास ने मंदिर की अद्वितीय वास्तुकला, विशाल संरचना और इसके आध्यात्मिक उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मंदिर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का केंद्र बनेगा।

मोहन भागवत का यह दौरा इस बात का प्रतीक बना कि सनातन संस्कृति, सेवा और शिक्षा के समन्वय से भारत न केवल अपने समाज को सशक्त बना सकता है, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सद्भाव का मार्ग भी दिखा सकता है।

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