बिष्णुपुर जिले में दो धमाके, दो घायल; राज्य में बढ़ाई गई सुरक्षा, 24 घंटे के बंद का आह्वान
मणिपुर। अशांत मणिपुर में एक बार फिर हिंसा ने चिंता बढ़ा दी है। बिष्णुपुर जिले में हुए दोहरे बम विस्फोटों की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह फैसला घटना की गंभीरता और राज्य की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए लिया गया है। सोमवार सुबह फौगाकचाओ पुलिस थाना क्षेत्र के न्गाउकॉन इलाके में हुए इन दो विस्फोटों में दो लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।
सुनसान घर में पहला धमाका, भीड़ जुटने पर दूसरा विस्फोट
पुलिस के अनुसार पहला धमाका सुबह करीब 5 बजकर 45 मिनट पर हुआ। यह विस्फोट एक ऐसे घर में हुआ, जो पिछले काफी समय से खाली पड़ा था। प्रारंभिक जांच में संदेह जताया गया है कि यह धमाका तात्कालिक विस्फोटक उपकरण यानी आईईडी के जरिए किया गया। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग सहम गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पहले विस्फोट की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोग मौके के आसपास इकट्ठा होने लगे। इसी दौरान करीब 200 मीटर दूर सुबह लगभग 8 बजकर 45 मिनट पर दूसरा धमाका हुआ। इस दूसरे विस्फोट में दो लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
एनआईए को सौंपी गई जांच, दोषियों की तलाश तेज
राज्य पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मामले को आगे की गहन जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि विस्फोटों के पीछे साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। एनआईए की टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण कर सबूत जुटाएगी और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय में जांच को आगे बढ़ाएगी।
पूरे इलाके में तलाशी अभियान, सुरक्षा कड़ी
विस्फोटों के बाद आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हिंसा को और भड़कने से रोकने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है। विस्फोटों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं।
जातीय हिंसा से जूझ रहा मणिपुर, बढ़ा तनाव
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब मणिपुर पहले से ही लंबे समय से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। मई 2023 से शुरू हुए कुकी और मैतेई समुदायों के बीच संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। जिस घर में पहला विस्फोट हुआ, वह भी जातीय हिंसा के बाद से वीरान पड़ा था और उसका मालिक परिवार सहित राहत शिविर में रह रहा है। ऐसे में इस विस्फोट ने लोगों के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।
संगठनों का विरोध, 24 घंटे के बंद का ऐलान
दोहरे विस्फोटों के विरोध में कई सामाजिक और छात्र संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है। स्वदेशी जन संगठन और अखिल मणिपुर छात्र संघ ने बुधवार रात 12 बजे से पूरे राज्य में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है। इसके अलावा मैतेई नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (सीओकोमी) ने इस घटना की तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है। संगठनों का कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक राज्य में शांति बहाल होना मुश्किल है।
राष्ट्रपति शासन के बीच नई चुनौती
गौरतलब है कि मणिपुर में फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू है। यह फैसला तब लिया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कुकी और मैतेई समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्षों से निपटने के उनके प्रशासनिक तरीके की आलोचनाओं के बीच इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति शासन के बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना केंद्र और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गई हैं।
शांति बहाली पर फिर सवाल
बिष्णुपुर में हुए दोहरे बम विस्फोटों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि मणिपुर में हालात अब भी बेहद नाजुक हैं। सुरक्षा बढ़ाने और जांच एजेंसियों को सक्रिय करने के बावजूद आम लोगों के मन में डर बना हुआ है। अब सबकी निगाहें एनआईए की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह पता चल सके कि इन विस्फोटों के पीछे कौन है और क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है।
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