पेरिस में जुटे 35 देश, लेकिन अमेरिका की प्राथमिकताएं बदलने से प्रगति पर संशय
पेरिस। रूस के साथ संभावित युद्धविराम के बाद यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था तय करने को लेकर सहयोगी देशों की एक अहम बैठक मंगलवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस में हो रही है, लेकिन इस बैठक से ठोस नतीजे निकलने की संभावना फिलहाल अनिश्चित नजर आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका का ध्यान वेनेजुएला संकट पर केंद्रित होना बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण यूक्रेन से जुड़े इस अहम कूटनीतिक प्रयास पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है।
मैक्रों को थी उम्मीद, लेकिन हालात बदले
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन को लेकर ‘इच्छुक देशों के गठबंधन’ की इस नई बैठक से काफी उम्मीदें जताई थीं। यह गठबंधन पिछले कई महीनों से इस बात पर विचार कर रहा है कि यदि रूस यूक्रेन के साथ युद्धविराम पर सहमत होता है, तो भविष्य में किसी भी रूसी हमले को कैसे रोका जाए और यूक्रेन की सुरक्षा को स्थायी रूप से कैसे सुनिश्चित किया जाए।
अमेरिका का फोकस बदला, नेतृत्व स्तर पर अनुपस्थिति
31 दिसंबर को अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा था कि यह शिखर बैठक यूक्रेन की रक्षा और न्यायपूर्ण व टिकाऊ शांति सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। मैक्रों के कार्यालय के अनुसार, इस बैठक में 27 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों सहित कुल 35 प्रतिभागी शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधित्व ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं। शुरुआत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के नेतृत्व की योजना थी, लेकिन वेनेजुएला में संभावित सैन्य हस्तक्षेप से जुड़े घटनाक्रमों के चलते उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी। इससे यह संकेत मिला कि फिलहाल वॉशिंगटन की प्राथमिकता यूक्रेन नहीं, बल्कि वेनेजुएला संकट है।
युद्धविराम से आगे की रणनीति पर चर्चा
पेरिस में हो रही इस बैठक में सहयोगी देश युद्ध समाप्त होने के बाद की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। प्रतिभागी पांच प्रमुख मुद्दों पर ठोस सहमति की उम्मीद कर रहे हैं। इनमें युद्धविराम की निगरानी की व्यवस्था, यूक्रेन के सशस्त्र बलों को दीर्घकालिक समर्थन, भूमि, समुद्र और वायु क्षेत्र में एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, रूस की ओर से दोबारा हमले की स्थिति में स्पष्ट सुरक्षा प्रतिबद्धताएं और यूक्रेन के साथ दीर्घकालिक रक्षा सहयोग शामिल है। हालांकि, मौजूदा हालात में यह साफ नहीं है कि इन मुद्दों पर मंगलवार की बैठक में कोई निर्णायक प्रगति हो पाएगी या नहीं।
यूक्रेन की चिंता: युद्धविराम कहीं खतरा न बन जाए
यूक्रेन इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। कीव को आशंका है कि बिना ठोस सुरक्षा गारंटी के युद्धविराम रूस को दोबारा संगठित होने और भविष्य में फिर से हमला करने का मौका दे सकता है। यूक्रेन चाहता है कि अमेरिका वॉशिंगटन से सैन्य और रणनीतिक सहायता की स्पष्ट गारंटी दे, ताकि अन्य सहयोगी देश भी उसी तरह की प्रतिबद्धताएं करने के लिए आगे आएं। यूक्रेनी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका की मजबूत भूमिका के बिना किसी भी शांति व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर रह जाएगी।
वेनेजुएला संकट ने बदला वैश्विक संतुलन
ट्रंप प्रशासन इस समय वेनेजुएला में नेतृत्व परिवर्तन के अपने फैसले के बाद उत्पन्न हालात से निपटने में व्यस्त है। इसी कारण यूक्रेन से जुड़ी कूटनीतिक कोशिशें फिलहाल दूसरे पायदान पर चली गई हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक राजनीति में अमेरिका की प्राथमिकताओं का यह बदलाव पेरिस बैठक के परिणामों को सीमित कर सकता है।
शांति वार्ता पर सवाल
पेरिस में जुटे सहयोगी देश भले ही यूक्रेन के भविष्य को लेकर गंभीर हों, लेकिन अमेरिका की अनिश्चित भूमिका के कारण यह बैठक निर्णायक मोड़ ले पाएगी या नहीं, इस पर सवाल बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या यह शिखर बैठक यूक्रेन के लिए ठोस सुरक्षा ढांचा तैयार कर पाएगी या फिर यह भी एक और अधूरी कूटनीतिक पहल बनकर रह जाएगी।
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