भर्ती पूरी तरह बंद, 500 से ज्यादा उग्रवादियों का आत्मसमर्पण, संगठन में बचे सिर्फ 17 स्थानीय कैडर

नई दिल्ली। तेलंगाना में वर्षों से सक्रिय माओवादी आंदोलन अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। लगातार पुलिस कार्रवाई, सख्त प्रतिबंध, आत्मसमर्पण नीति और नई भर्ती पूरी तरह रुकने के कारण यह प्रतिबंधित संगठन तेजी से कमजोर पड़ा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि राज्य में माओवादी गतिविधियां अब नाममात्र की रह गई हैं और संगठन के पूरी तरह खत्म होने की स्थिति बनती जा रही है।

पुलिस प्रमुख का दावा: संगठन लगभग समाप्ति की ओर

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि राज्य में माओवादी आंदोलन अब आखिरी सांसें गिन रहा है। उनके अनुसार, कड़े सुरक्षा उपायों और प्रभावी रणनीति के चलते माओवादी संगठन को भारी नुकसान हुआ है। वर्ष 2025 में ही राज्य में 500 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जो इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भरोसा और मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।

उन्होंने बताया कि इस समय तेलंगाना के मूल निवासी सिर्फ 17 सक्रिय अंडरग्राउंड माओवादी कैडर बचे हैं। इनमें से आधे से अधिक की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, जिससे यह साफ है कि संगठन में नई पीढ़ी का कोई जुड़ाव नहीं रह गया है। नई भर्ती पूरी तरह बंद हो चुकी है, जो किसी भी उग्रवादी संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जाता है।

माड़वी हिडमा की हत्या से कमजोर पड़ा नेटवर्क

माओवादी आंदोलन के कमजोर पड़ने की एक बड़ी वजह खतरनाक नक्सली माड़वी हिडमा की हत्या को भी माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हिडमा माओवादी नेटवर्क का एक अहम चेहरा था और उसके खत्म होने से संगठन की रणनीतिक क्षमता को गहरा झटका लगा। इसके बाद से कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां लगभग ठप हो गईं।

परिवारों और साथियों के जरिए समझाइश

पुलिस प्रमुख ने बताया कि तेलंगाना पुलिस अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उग्रवादियों के परिवारों, रिश्तेदारों और दोस्तों के जरिए उन्हें समझाया जा रहा है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें। इस नीति का असर भी दिख रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में कैडर स्वेच्छा से सामने आ रहे हैं।

केंद्रीय समिति में भी तेलंगाना के सदस्य

जानकारी के अनुसार, माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति के सात सदस्यों में से चार तेलंगाना से जुड़े रहे हैं। हालांकि, अब संगठन का केंद्रीय ढांचा भी कमजोर पड़ता जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय तेलंगाना के केवल 17 अंडरग्राउंड कैडर बचे हैं, जो संगठन की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।

बादसे सुक्का के आत्मसमर्पण से बड़ा झटका

माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका तब लगा, जब पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन का कमांडर बादसे सुक्का उर्फ देवा ने आत्मसमर्पण कर दिया। 3 जनवरी को उसने अपने 19 अंडरग्राउंड कैडर के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। यह आत्मसमर्पण संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद

आत्मसमर्पण करने वाले इस समूह ने पुलिस को बड़ी मात्रा में हथियार सौंपे। इनमें एके-47 राइफलें, आईएनएसएएस राइफलें, ग्रेनेड, हेलीकॉप्टर शॉट और अलग-अलग कैलिबर के कुल 2,206 राउंड गोला-बारूद शामिल थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि संगठन अब हथियारों के साथ भी खुद को संभाल पाने की स्थिति में नहीं है।

माओवादी आंदोलन के अंत की ओर संकेत

तेलंगाना में मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि माओवादी आंदोलन अब अपने अंतिम चरण में है। न तो नई भर्ती हो रही है, न ही संगठन में नेतृत्व का भरोसा बचा है। लगातार आत्मसमर्पण और वरिष्ठ कैडरों का कमजोर होना यह दर्शाता है कि आने वाले समय में तेलंगाना माओवादी हिंसा से लगभग मुक्त हो सकता है।