संसद में गतिरोध के बीच विपक्ष का आरोप: सरकार बोलने का अवसर नहीं दे रही, सत्ता पक्ष ने कहा– विपक्ष संसद की गरिमा तोड़ रहा
नई दिल्ली, 05 फ़रवरी (हि.स.)। लोकसभा में लगातार हो रहे हंगामे और आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन के बीच गुरुवार को संसद परिसर में सियासी हलचल तेज़ रही। इसी क्रम में विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौजूदा संसदीय हालात, सांसदों के निलंबन और आगे की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे।
विपक्ष की रणनीति पर मंथन
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए निलंबन जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उनका तर्क था कि संसद बहस और संवाद का मंच है, न कि केवल सरकारी निर्णयों की औपचारिक मुहर लगाने का स्थान। विपक्षी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सदन में असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसी अधिकार के तहत विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
#WATCH | Delhi | Meeting of the INDIA bloc floor leaders, underway in Parliament House
— ANI (@ANI) February 5, 2026
(video source: AICC) pic.twitter.com/JaSQW0jwin
निलंबित सांसदों का धरना, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
इसी दौरान निलंबित विपक्षी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए साफ कहा कि जब तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। सांसदों ने इसे केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मुद्दा न बताते हुए पूरे विपक्ष और संसदीय लोकतंत्र से जुड़ा सवाल करार दिया।
धरने पर बैठे सांसदों का कहना था कि बार-बार कार्यवाही बाधित होने और निलंबन की कार्रवाई से सरकार आलोचनात्मक सवालों से बचना चाहती है। उनके अनुसार, यदि विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर ही नहीं मिलेगा, तो संसद की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
शिवराज सिंह चौहान का तीखा बयान
सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू को लेकर की गई टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक है। शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि बिट्टू का परिवार आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में अपना सब कुछ न्योछावर कर चुका है और ऐसे परिवार के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग निंदनीय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का विरोध करते-करते राहुल गांधी अब देश का ही विरोध करने लगे हैं। शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, राजनीतिक असहमति का मतलब व्यक्तिगत या राष्ट्रीय भावनाओं पर चोट करना नहीं होना चाहिए।
चिराग पासवान ने विपक्षी आचरण पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाज़ी करते हैं और इससे राजनीति में विभाजन बढ़ता है। चिराग पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर काम कर रहा है और संसद में सकारात्मक चर्चा चाहता है।
उन्होंने विपक्षी सांसदों के व्यवहार का ज़िक्र करते हुए कहा कि सचिवालय की कुर्सी पर चढ़ना, काग़ज़ फाड़ना और अध्यक्ष की ओर उछालना संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने यह भी बताया कि एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को मर्यादित आचरण बनाए रखने की सख़्त हिदायत दी थी। चिराग पासवान के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष के अहंकार और ज़िद के कारण पूरा विपक्ष कमजोर पड़ता जा रहा है।
सियासी टकराव से संसद का कामकाज प्रभावित
लोकसभा और राज्यसभा में जारी इस टकराव का सीधा असर संसद के कामकाज पर पड़ रहा है। जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र की आवाज़ दबाने की कोशिश बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष अनावश्यक हंगामे के ज़रिए संसदीय परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहा है। मौजूदा हालात में यह साफ है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी के कारण गतिरोध गहराता जा रहा है और इसका समाधान निकट भविष्य में आसान दिखाई नहीं देता।
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