सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने, लोकतंत्र और चर्चा के अधिकार पर गरमाई बहस
नई दिल्ली। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सदन के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच शब्दों का तीखा आदान-प्रदान हुआ। बहस के दौरान जेपी नड्डा ने बिना नाम लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें “अबोध बालक” कहा और खरगे से अपील की कि वे अपनी पार्टी को ऐसे व्यक्ति का बंधक न बनने दें।
“अबोध और अहंकार का मिश्रण घातक”
जेपी नड्डा ने सदन में कहा कि खरगे उनसे वरिष्ठ हैं और उनके अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि अबोधता और अहंकार का मिश्रण बेहद घातक होता है। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस को इस मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता है और पार्टी के भीतर यह समझाना चाहिए कि लोकतांत्रिक तरीके से ही काम किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सदन में शोरगुल बढ़ गया और विपक्षी सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई।
मोदी सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप खारिज
जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए सदैव तैयार रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में प्रधानमंत्री चर्चा के लिए उपस्थित थे, लेकिन विपक्ष ने सदन की कार्यवाही को चलने नहीं दिया। राज्यसभा में भी विपक्ष ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बयान की मांग की थी, जिस पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट रूप से सरकार का पक्ष रखा। नड्डा ने कहा कि जब समझौते का पूरा विवरण तैयार हो जाएगा, तब उसे सार्वजनिक किया जाएगा।
संसदीय कार्यवाही में बाधा पर सरकार की आपत्ति
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया, यह आरोप तथ्यहीन है। रिजिजू के अनुसार राहुल गांधी को निर्धारित समय से बीस मिनट अधिक बोलने का अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने बार-बार पीठ की व्यवस्था का उल्लंघन किया और वही बातें दोहराते रहे जिनकी अनुमति नहीं थी।
खरगे का पलटवार: लोकतंत्र कुचलने का आरोप
जेपी नड्डा और किरण रिजिजू के बयानों के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मिलकर बनती है और यदि एक सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाएगा तो उसका असर दूसरे सदन पर भी पड़ेगा। खरगे ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष अहंकार में है और लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
संसद में टकराव के बीच गतिरोध
राज्यसभा में हुई इस तीखी बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर सत्ता पक्ष खुद को चर्चा के लिए तैयार बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहा है। इस टकराव का असर सदन की कार्यवाही पर भी साफ दिखाई दिया, जहां बार-बार हंगामे की स्थिति बनी रही।
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