आज की जीवनशैली में कार केवल एक साधारण वाहन नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। लोग ऑफिस जाना हो, परिवार के साथ यात्रा करनी हो या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना हो, कार हर जगह साथ होती है। यही वजह है कि लोग अपनी कार को भी घर की तरह सुरक्षित और शुभ बनाना चाहते हैं। कई लोग कार में धार्मिक मूर्तियां या प्रतीक इस विश्वास के साथ रखते हैं कि इससे यात्रा सुरक्षित रहेगी और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होगी।
लेकिन वास्तु शास्त्र यह स्पष्ट करता है कि हर स्थान की ऊर्जा अलग होती है। कार एक चलायमान स्थान है, जहां लगातार गति, कंपन और दिशा परिवर्तन होता रहता है। ऐसे वातावरण में वही वस्तुएं शुभ मानी जाती हैं, जो स्थिरता और ध्यान बनाए रखने में मदद करें। गलत वस्तुएं या मूर्तियां कार में रखने से सकारात्मक प्रभाव की जगह ऊर्जा असंतुलन भी हो सकता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
कार में मूर्तियां रखना क्यों बन सकता है समस्या
वास्तु शास्त्र के अनुसार देव मूर्तियों को शांत, स्वच्छ और स्थिर स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए। कार में लगातार झटके लगते हैं, ब्रेक और मोड़ आते हैं, जिससे मूर्तियां हिलती रहती हैं। इसे धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। मूर्ति का बार-बार हिलना या गिरना मानसिक असहजता भी पैदा कर सकता है।
इसके अलावा कार के अंदर जगह सीमित होती है। अगर मूर्तियां गलत जगह रखी जाएं, तो वे चालक का ध्यान भटका सकती हैं। वास्तु शास्त्र में यह स्पष्ट कहा गया है कि यात्रा के समय चालक का पूरा ध्यान सड़क पर होना चाहिए। किसी भी प्रकार की बाधा या ध्यान भटकाने वाली वस्तु दुर्घटना की आशंका बढ़ा सकती है।
किन मूर्तियों को कार में रखने से बचना चाहिए
वास्तु नियमों के अनुसार कार में भारी, बड़ी या बहुत अधिक संख्या में मूर्तियां रखना उचित नहीं माना जाता। विशेष रूप से ऐसी मूर्तियां जिनकी मुद्रा उग्र, गंभीर या भय दर्शाने वाली हो, उन्हें कार में रखने से बचना चाहिए। ऐसी आकृतियां मन पर अनजाने में तनाव का प्रभाव डाल सकती हैं।
इसके अलावा टूटी हुई, खंडित या पुरानी मूर्तियां भी कार में नहीं रखनी चाहिए। वास्तु शास्त्र में टूटी वस्तुओं को नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। कार में ऐसी वस्तुएं रखने से यात्रा के दौरान बार-बार असहजता, चिड़चिड़ापन या अनचाही परेशानियां सामने आ सकती हैं।
कार में मूर्तियां रखने से जुड़े संभावित नुकसान
जब कार में वास्तु नियमों के विपरीत वस्तुएं रखी जाती हैं, तो इसका असर केवल धार्मिक भावना तक सीमित नहीं रहता। कई बार लोग महसूस करते हैं कि बिना किसी स्पष्ट कारण के यात्रा के दौरान बेचैनी होती है, मन अशांत रहता है या ध्यान भटकता है। वास्तु शास्त्र इसे ऊर्जा असंतुलन से जोड़कर देखता है।
कुछ मामलों में लोग बार-बार वाहन खराब होने, अचानक खर्च बढ़ने या छोटी-मोटी दुर्घटनाओं की शिकायत भी करते हैं। हालांकि हर घटना का कारण केवल वास्तु नहीं होता, लेकिन लगातार नकारात्मक अनुभव होने पर कार के अंदर के वातावरण और वस्तुओं पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
कार में क्या रखना माना जाता है अपेक्षाकृत सुरक्षित
अगर कोई व्यक्ति आस्था के कारण कार में कुछ शुभ रखना चाहता है, तो वास्तु शास्त्र सीमित और हल्की वस्तुओं की सलाह देता है। वस्तु ऐसी होनी चाहिए जो न तो चालक का ध्यान भटकाए और न ही कार में अव्यवस्था पैदा करे। बहुत बार सरलता ही सबसे बड़ा समाधान होती है।
वास्तु के अनुसार कार का अंदरूनी वातावरण साफ, खुला और संतुलित होना चाहिए। साफ-सफाई, उचित रोशनी और व्यवस्थित स्थान सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने में अधिक सहायक माने जाते हैं, बजाय अधिक सजावट या भारी वस्तुओं के।
कार में अव्यवस्था भी बन सकती है वास्तु दोष
वास्तु दोष केवल मूर्तियों से ही नहीं, बल्कि अव्यवस्था से भी पैदा हो सकता है। कार में लंबे समय तक पड़े पुराने कागज, टूटी वस्तुएं, खराब सामान या अनावश्यक चीजें नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं। इससे मन पर भी बोझ महसूस हो सकता है।
वास्तु शास्त्र साफ और सुव्यवस्थित वातावरण को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ता है। इसलिए समय-समय पर कार की सफाई करना और गैर-जरूरी वस्तुओं को हटाना यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुखद बना सकता है।
यात्रा सुरक्षा और वास्तु का संबंध
वास्तु शास्त्र का मूल उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में संतुलन और सुरक्षा बनाए रखना है। कार के संदर्भ में इसका अर्थ है कि यात्रा के समय मन शांत रहे और ध्यान पूरी तरह सड़क पर केंद्रित हो। अगर कार में रखी कोई भी वस्तु डर, तनाव या भ्रम पैदा करती है, तो उसे तुरंत हटा देना ही समझदारी है।
वास्तु नियम डराने के लिए नहीं बनाए गए हैं, बल्कि व्यक्ति को सजग और संतुलित रहने का संकेत देते हैं। सुरक्षित यात्रा के लिए मानसिक स्पष्टता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आम गलतफहमियां जो लोग करते हैं
कई लोग यह मान लेते हैं कि कार में जितनी ज्यादा धार्मिक वस्तुएं होंगी, उतनी ही ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। वास्तु शास्त्र इस सोच से सहमत नहीं है। अधिकता भी ऊर्जा असंतुलन का कारण बन सकती है, चाहे वह किसी भी रूप में हो।
कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के दूसरों को देखकर वही वस्तुएं अपनी कार में रख लेते हैं, जबकि हर व्यक्ति की परिस्थिति और आवश्यकता अलग होती है। वास्तु शास्त्र हमेशा सोच-समझकर और संतुलन के साथ निर्णय लेने की सलाह देता है।
निष्कर्ष
कार में मूर्तियां या धार्मिक वस्तुएं रखना आस्था से जुड़ा विषय हो सकता है, लेकिन वास्तु शास्त्र सुरक्षा, संतुलन और ध्यान को सर्वोच्च मानता है। गलत वस्तुएं, अव्यवस्था या ध्यान भटकाने वाले तत्व कार में रखने से मानसिक अशांति और जोखिम बढ़ सकता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपकी यात्रा सुरक्षित, शांत और सुखद बनी रहे, तो कार को साफ, व्यवस्थित और अनावश्यक वस्तुओं से मुक्त रखें। वास्तु शास्त्र का सही पालन डर नहीं, बल्कि समझदारी और संतुलन का मार्ग दिखाता
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