चीनी आव्रजन अधिकारियों की कथित हरकत पर भारत का कड़ा विरोध, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की दो टूक

तमिलनाडु। अरुणाचल प्रदेश की एक महिला के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर कथित रूप से हुए दुर्व्यवहार के मामले पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। इस पूरे घटनाक्रम पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा है कि “अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। इस तरह की किसी भी रणनीति से जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली।” विदेश मंत्री का यह बयान न केवल कूटनीतिक स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ऐसे मामलों में भारत किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

शंघाई एयरपोर्ट पर क्या हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक भारतीय महिला को शंघाई एयरपोर्ट पर चीनी आव्रजन अधिकारियों द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया। आरोप है कि महिला की पहचान और दस्तावेजों को लेकर अनावश्यक सवाल किए गए और उसे असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। यह मामला सामने आने के बाद भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप किया।

कोई जबरदस्ती नहीं हुई', अरुणाचल की बेटी के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर हुए दुर्व्यवहार  पर चीन का रिएक्शन - china denies allegation of harassment of indian woman  at shanghai airport

भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

विदेश मंत्री जयशंकर ने तमिलनाडु में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भारत ने इस घटना पर औपचारिक रूप से विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा, “हमने इस पर स्पष्ट रूप से आपत्ति जताई है और यह भी कहा है कि इस तरह के कदम उठाने से वास्तविकता में कुछ भी नहीं बदलता।” उन्होंने दोहराया कि भारत की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और दृढ़ है, और किसी भी प्रकार की दबाव नीति या उत्पीड़न को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय नियमों का हवाला

जयशंकर ने इस मुद्दे को केवल द्विपक्षीय विवाद तक सीमित न रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया में लोगों के आवागमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय संधियां और नियम मौजूद हैं, जिनका पालन सभी देशों से अपेक्षित है। “अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और नियमों के तहत यात्रियों के ट्रांजिट से जुड़े स्पष्ट प्रावधान हैं और हम चाहते हैं कि हर देश उनका सम्मान करे,” उन्होंने कहा। यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत इस मामले को वैश्विक नियमों के उल्लंघन के रूप में भी देख रहा है।

अरुणाचल प्रदेश पर भारत का अडिग रुख

विदेश मंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अविभाज्य अंग है और इस पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। “हमारी स्थिति बहुत मजबूत और साफ है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि आप सभी इस पर पूरी तरह आश्वस्त होंगे,” जयशंकर ने कहा।

कूटनीतिक संदेश और आंतरिक भरोसा

इस बयान को केवल एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपने नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और संवैधानिक पहचान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही, यह संदेश भी गया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने अधिकारों और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर पूरी तरह सजग और सक्रिय है।

व्यापक संदर्भ में घटना का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में भारत की त्वरित और सख्त प्रतिक्रिया न केवल नागरिकों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार विदेशों में भारतीयों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर भारत का यह रुख पहले भी स्पष्ट रहा है और इस ताजा बयान ने उसे और मजबूती दी है।

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