संघ शताब्दी वर्ष के तहत चार प्रमुख संवाद कार्यक्रम, समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद
भोपाल, 02 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रही प्रवास शृंखला के अंतर्गत मोहन भागवत आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दो दिवसीय प्रवास पर पहुंच रहे हैं। इस प्रवास के दौरान वे मध्य भारत प्रांत के विभाग केंद्र पर समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद करेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित यह प्रवास केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा, वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और देश-समाज निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर गंभीर विमर्श का मंच माना जा रहा है।
शताब्दी वर्ष में संवाद पर विशेष जोर
संघ के शताब्दी वर्ष के चलते संगठन की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में संवादात्मक कार्यक्रमों की शृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में भोपाल प्रवास के दौरान सरसंघचालक युवाओं, सामाजिक-धार्मिक नेतृत्व और मातृशक्ति से अलग-अलग सत्रों में संवाद करेंगे। इन संवादों का उद्देश्य संघ के कार्य, विचार और सामाजिक दृष्टिकोण को लेकर समाज में मौजूद जिज्ञासाओं का समाधान करना और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता की भावना को मजबूत करना है। सभी कार्यक्रम चयनित सहभागियों के साथ संवादात्मक स्वरूप में होंगे, जहां प्रश्न, विचार और अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण पर मंथन
विभाग प्रमुख सोमकांत उमालकर के अनुसार, प्रवास के पहले दिन सुबह साढ़े नौ बजे से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रांत स्तरीय युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 16 जिलों से चुने गए ऐसे युवा शामिल होंगे, जिन्होंने शिक्षा, सेवा, नवाचार, सामाजिक कार्य और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। संवाद के दौरान सरसंघचालक युवाओं से राष्ट्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और मूल्यों की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे। माना जा रहा है कि यह सत्र युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रमुख जन गोष्ठी में सौ वर्ष की यात्रा पर चर्चा
इसी दिन शाम साढ़े पांच बजे से रविन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया है। इसमें भोपाल विभाग के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय प्रमुख व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया है। इस गोष्ठी में संघ की शताब्दी यात्रा, सामाजिक समरसता, वर्तमान समय की चुनौतियां और उनके समाधान पर संवाद होगा। सरसंघचालक संघ के अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट करेंगे कि बदलते सामाजिक परिदृश्य में किस प्रकार सामूहिक प्रयासों से संतुलन और एकता बनाए रखी जा सकती है।
सामाजिक सद्भाव बैठक में एकता पर जोर
सरसंघचालक के प्रवास के दूसरे दिन 03 जनवरी को सुबह साढ़े नौ बजे से पुनः कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ आयोजित की जाएगी। इस बैठक में प्रांत के सभी जिलों से विभिन्न समाजों के प्रमुख लोग शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता, समरसता और पारस्परिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना है। इस मंच से सरसंघचालक समाज को जोड़ने वाले विचारों, साझा जिम्मेदारियों और आपसी विश्वास की आवश्यकता पर मार्गदर्शन देंगे। संघ का मानना है कि सामाजिक सद्भाव ही सशक्त राष्ट्र की बुनियाद है।
मातृशक्ति संवाद में महिला नेतृत्व पर विमर्श
इसी दिन शाम पांच बजे भोपाल की प्रमुख मातृशक्ति के साथ ‘शक्ति संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस संवाद में समाज, परिवार और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। महिला सहभागिता, सामाजिक नेतृत्व और संस्कार निर्माण में मातृशक्ति के योगदान को लेकर यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। संघ के शताब्दी वर्ष में यह संवाद महिलाओं की भूमिका को और अधिक सशक्त रूप में सामने लाने का प्रयास माना जा रहा है।
चयनित सहभागियों के साथ तथ्यात्मक संवाद
विभाग प्रमुख सोमकांत उमालकर ने स्पष्ट किया कि इन सभी सत्रों में सहभागिता के लिए लोगों का चयन पहले से किया गया है। शताब्दी वर्ष में ऐसे आयोजनों का उद्देश्य यह भी है कि समाज में संघ को लेकर जो प्रश्न और जिज्ञासाएं हैं, उनका तथ्यात्मक और वास्तविक उत्तर दिया जा सके। सरसंघचालक इस प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य, विचार और सामाजिक भूमिका से जुड़ी वास्तविक जानकारी साझा करेंगे।
शताब्दी वर्ष में बढ़ी संघ को जानने की जिज्ञासा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के चलते समाज के विभिन्न वर्गों में संघ को लेकर रुचि और जिज्ञासा बढ़ी है। भोपाल प्रवास को इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण वैचारिक और सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रवास के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि देश और समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है और संवाद के जरिए ही सामाजिक समरसता को मजबूत किया जा सकता है।
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