israel iran war: मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनज़र देश में कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है, इसको देखते हुए सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों के साथ सोमवार को एक बैठक की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी अध्यक्षता में कोई इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सार्वजनिक उपक्रमों के शीर्ष प्रबंधन के अधिकारी शामिल हुए।
केंद्र की पेट्रोलियम कंपनियों के साथ बैठक
बैठक में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, आपूर्ति मार्गों, शिपमेंट की स्थिति और भारत की रणनीतिक भंडारण क्षमता पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि देश में फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और पेट्रोल-डीजल जैसे प्रमुख उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति शृंखला सामान्य रूप से संचालित हो रही है।
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सूत्र के मुताबिक, मंत्री ने अधिकारियों को साफ कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित व्यवधान से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देशवासियों को पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और उनकी किफायती दरों को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार की प्राथमिकता है कि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
रुस से फिर तेल खरीद सकता है भारत
russian oil import: पिछले कुछ दिनों में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।
भारत की समुद्र में खड़े रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है। सप्लाई में कमी आने की स्थिति में भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी।
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वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने पर चर्चा
बैठक में यह भी समीक्षा की गई कि यदि वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ता है तो वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों से आयात बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने और रणनीतिक भंडार का उपयोग करने जैसी योजनाओं को किस प्रकार लागू किया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार की स्थिति पर सतत निगरानी रखें और आवश्यकतानुसार त्वरित निर्णय लें।
In view of ongoing geopolitical developments in the Middle East, the Minister of Petroleum & Natural Gas reviewed the supply situation for crude oil, LPG, and other petroleum products with senior officials from the Ministry and PSUs.
— Ministry of Petroleum and Natural Gas #MoPNG (@PetroleumMin) March 2, 2026
We are continuously monitoring the evolving… pic.twitter.com/N4tZHktXSM
ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में अस्थिरता का असर अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी देखने को मिलता है। हालांकि, सरकार की सक्रिय निगरानी और पूर्व तैयारी से संभावित प्रभाव को सीमित रखने में मदद मिल सकती है। सरकार ने दोहराया है कि ऊर्जा सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय और तेल कंपनियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में उपभोक्ताओं को असुविधा न हो और बाजार में स्थिरता बनी रहे।
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