भारत सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भारत की उभरती गिग अर्थव्यवस्था पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में काम कर रहे 40 प्रतिशत गिग कर्मी यानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर त्वरित सेवा जैसे खाना या ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराने वाले कर्मी की मासिक आय 15 हजार से भी कम है। उन्हें प्रतिदिन टास्क के आधार पर मानदेय प्राप्त होता है। यह निश्चित नहीं होता और समय समय पर घटता बढ़ता रहता है।
कहां काम करते गिग कर्मी
ऑनलाईन त्वरित सेवा उपलब्ध करने वाले प्लेटफॉर्म या ऑनलाईन भोजन उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म के लिए डिलीवरी का काम करने वाले कर्मी ये अस्थाई रूप से इन प्लेटफॉर्म पर काम करते है। प्रति ऑर्डर के हिसाब से पैसे मिलते हैं। रेपीडो, ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिंट जैसे प्लेटफॉर्म पर जुड़ कर गिग कर्मी काम करते हैं।
असमान आय होने से बैंक ऋण भी नही
आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि गिग कर्मियों की आय में असमानता के कारण बैंक इन्हें आसानी से ऋण की सुविधा उपलब्ध नहीं कराती। जिसके कारण गिग कर्मी वित्तीय सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। सरकार का मानना है कि लोगों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए जिससे लोगों को मजबूर नहीं बल्कि अपनी मर्जी से यह काम करना पड़े।
सरकार को रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि गिग कर्मियों को भुगतान तय प्रति घंटा या प्रति टास्क के हिसाब से भुगतान किया जाए एवं ‘न्यूतम अर्जन’ (अर्निंग) की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।
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2030 तक जीडीपी में 2.35 लाख रुपए का योगदान रहेगा
इस सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले समय में गिग इकोनॉमी देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बनेगी । 2030 तक इसका भारत की जीडीपी में योगदान लगभग 2.35 लाख करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।
बीते दिनों जोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म के वर्कर्स ने बेहतर वेतन और वर्किंग कंडीशन को लेकर प्रदर्शन भी किए थे। इसे देखते हुए सर्वे की ये सिफारिशें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
1.2 करोड़ हुई गिग कर्मीयों की संख्या
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में गिग वर्कफोर्स बहुत तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2021 में गिग कर्मीयों की संख्या 77 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2025 में 55% बढ़कर 1.2 करोड़ पहुंच गई है। फिलहाल कुल वर्कफोर्स में इनकी हिस्सेदारी 2% से ज्यादा है। अनुमान है कि साल 2029-30 तक गैर कृषी क्षेत्र की कुल नौकरियों में गिग कर्मीयों की हिस्सेदारी 6.7% हो जाएगी।
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