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मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए प्रस्तुत यह बजट सुख और कल्याण आधारित बजट है। प्रजा का सुख ही राजा का सुख है, इसी भावना पर आधारित बजट में सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। पिछले कुछ वर्षों से मध्यप्रदेश सरकार के बजट का आकार निरंतर बढ़ता जा रहा है।
निरंतर बढ़ते 4,38,317 करोड़ के इस बजट में ज्ञान में आई और जोड़कर ज्ञानी किया गया है और यह आई इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। कैपेक्स यानी पूंजीगत निवेश की मात्रा में वृद्धि है और उसमें सबसे अधिक ध्यान अधोसंरचना के विकास पर है। सड़कों के विस्तार, पुलों के निर्माण, ताप विद्युत, वायु परिवहन संरचना के विस्तार के लिए प्रावधान है। नगरों में मेट्रो ट्रेन के लिए तो गांवों में ग्रामीण सड़क परिवहन के लिए सबसे अधिक प्रावधान रखे गए हैं। बजट की दूसरा प्रमुख प्राथमिकता ‘ई’ पर है। जहां इलेक्टि्रक व्हीकल, ई-समन या वारंट पेपरलेस करने के लिए, कर्मचारियों के लिए ईजीपीएफ जैसे नवीन प्रावधान है।
हरित बजट में वन क्षेत्र आधारित विभिन्न योजनाएं, अभयारण्य विस्तार, वृक्षारोपण कार्यक्रम, चंदन वृक्षों का रोपण, संस्कृत बंद पौधरोपण, कृषि वानिकी, वन विविधता जैसे अनेक प्रावधान है, जो स्वागत योग्य है। वन पर्यटन के अतिरिक्त मध्यप्रदेश धार्मिक पर्यटन में भी अच्छा काम कर रहा है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के उदाहरण को लेते हुए अब अन्य धार्मिक स्थलों का विकास भी सरकार की प्राथमिकताओं में स्थान रख रहा है। इन धार्मिक स्थलों में कॉरिडोर निर्माण, रोप वे निर्माण, किलों का रख रखाव प्रमुख है।
लोक परंपराओं को संरक्षित करता है यह बजट
बजट में एक अच्छा प्रयास परंपरागत कलाओं, लोक गीतों बोलियों के संरक्षण पर भी है। मध्यप्रदेश में विभिन्न बोलियां बोली जाती है, आधुनिकता की हवा में यह लुप्त होती जा रही थी, इन्हें संरक्षण की तीव्र आवश्यकता है। वित्त वर्ष 2026- 27 का यह बजट केंद्रीय बजट की परछाई है। हर वर्ग को साधने की कोशिश है। प्रधानमंत्री... शब्द से प्रारंभ हुई योजनाओं की पुनरावृत्ति वित्त मंत्री की प्रधानमंत्री के लिए प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है या विकसित भारत 2047 में मध्यप्रदेश के योगदान को प्रदर्शित करती है। बजट की आलोचना इस तथ्य में निहित है, जो विपक्ष ने भी सदन में उठाई। कहीं यह बजट ऋणम कृत्वा... तो नहीं है। सरकार निरंतर कर्ज ले रही है और इतने अधिक कर्ज के बावजूद भी जो सौगात दे रही है, उनके लिए वित्त की व्यवस्था कहां से होगी। लाडली बहनों के लिए राशि बढ़ाने का प्रावधान है। किसानों के लिए अनेक प्रावधान है। उद्यमियों के लिए अनेक प्रावधान है। कर्मचारियों के लिए केवल शुक्रिया है। महंगाई भत्ते के लिए उन्हें और इंतजार करना होगा।
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