नई दिल्ली: एआई इम्पैक्ट समिट में ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया है, ऐसे इसलिए किया गया क्योंकि यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि ने एक चीनी कंपनी के डॉग रोबोट और कोरियन कंपनी के ड्रोन को एक मीडिया कवरेज में अपना प्रोजेक्ट बताया था।
जब यह रिपोर्ट वायरल हुई तो सोशल मीडिया पर लोगों ने इस दावे का खंडन करना शुरू किया। जिसके बाद यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर कर दिया गया। यूनिवर्सिटी के पवेलियन में बेरिकेटिंग कर दी है। मामला बढ़ने के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया।
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2011 में ग्रेटर नोएडा में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं।
विपक्षी नेताओं ने मामले को तूल दिया
ये Robotic Dog चीन में पैदा हुआ,
— Indian Youth Congress (@IYC) February 17, 2026
मंत्री अश्विनी वैष्णव से लेकर Galgotias University और दूरदर्शन ने इसे भारतीय आविष्कार बताने में कोई कसर नही छोड़ी। इसे Modi ji का Vision बताया गया।
अभी अंतरराष्ट्रीय मंच और भद्द पिटवाना बाकी है? pic.twitter.com/CB6nWsuBVY
झूठ की बुनियाद गलघोटिया यूनिवर्सिटी —
— Akhilesh Yadav (Son Of PDA) (@SocialistLeadr) February 18, 2026
उसी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने बताया कि “ओरायन” को विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित किया गया है।
इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर लगभग ₹350 करोड़ (करीब 39 मिलियन डॉलर) का निवेश किया गया था।
यानी यह प्रोजेक्ट… pic.twitter.com/SkaKgd4jLJ
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद
वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम 'ओरियन' है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि हमारी यूनिवर्सिटी देश की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी है जो AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी 'यूनिट्री' का 'Go2' मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है।
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वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में 'शुरुआत से' तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने 40 हजार वाला रेडीमेड 'स्ट्राइककर V3 ARF' मॉडल बताया है।
यूनिवर्सिटी का स्पस्टीकरण
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