भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 38, प्रोजेक्ट चीता को नई मजबूती
श्योपुर, 18 फरवरी। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित Kuno National Park से एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण की बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस नए जन्म के साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है। गामिनी दूसरी बार मां बनी है और यह प्रसव प्रोजेक्ट चीता की सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने जताई खुशी, पुनर्स्थापन का सशक्त केंद्र बन रहा मप्र
इस उपलब्धि की जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने सामाजिक माध्यम पर साझा की। उन्होंने गामिनी और उसके शावकों का वीडियो साझा करते हुए इसे अत्यंत हर्ष का विषय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीतों के पुनर्स्थापन में मध्य प्रदेश सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। कूनो में चीतों के आगमन के तीन वर्ष पूर्ण होने के साथ यह नौवां सफल प्रसव है। भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या अब 27 हो गई है, जो परियोजना की प्रगति का स्पष्ट संकेत है।
चीतों के पुनर्स्थापन का सशक्त केंद्र मध्यप्रदेश…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 18, 2026
अत्यंत हर्ष का विषय है कि प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता ‘गामिनी’ ने 3 शावकों को जन्म दिया है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में आए चीतों के तीन वर्ष पूर्ण होने के साथ यह 9वां सफल प्रसव है।… pic.twitter.com/vr24Qcuf7U
केंद्रीय मंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को गामिनी द्वारा तीन शावकों को जन्म दिया जाना प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। दक्षिण अफ्रीकी चीतों के भारत आगमन के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह सफलता सामने आना संरक्षण अभियान की मजबूती को दर्शाता है।
प्रोजेक्ट चीता : चुनौतियों से सफलता तक
गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। शुरुआती दौर में कुछ चीतों की मृत्यु ने चिंता बढ़ाई थी, किंतु लगातार निगरानी, चिकित्सा देखरेख और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण अब सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का प्रारंभिक अनुमान था कि यदि एक तिहाई चीते भी सुरक्षित रह पाए तो परियोजना को सफल माना जाएगा। परंतु साढ़े तीन वर्षों में हुए प्रजनन और बढ़ती संख्या ने अपेक्षाओं से बेहतर परिणाम दिए हैं। गामिनी ने 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था, जो अब तक का सबसे बड़ा प्रजनन रहा। इसके बाद 22 नवंबर 2024 को निर्वा ने दो शावकों को जन्म दिया और 4 फरवरी 2025 को वीरा ने भी दो शावकों को जन्म देकर परियोजना को आगे बढ़ाया।
वर्तमान स्थिति और आगे की तैयारी
वर्तमान में नर चीतों में प्रभाष, पावक, वायु और अग्नि शामिल हैं, जबकि मादा चीतों में गामिनी, निर्वा, वीरा और धीरा सक्रिय हैं। उदय, तेजस, सूरज और दक्षा की मृत्यु हो चुकी है। प्रभाष, पावक और धीरा को मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य में बसाया गया है, जहां से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
परियोजना निदेशक उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार भारत ने इस अभियान से कई महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किए हैं। अब तीसरे चरण में 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ और चीते लाए जाने हैं। इससे परियोजना को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कूनो के वन अधिकारियों का कहना है कि अब चीते कूनो के जंगल का स्वाभाविक हिस्सा बनते जा रहे हैं। उनकी गतिविधियां प्राकृतिक रूप ले रही हैं और प्रबंधन का ध्यान दीर्घकालिक स्थिरता, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संतुलन पर केंद्रित है।
चीतों की बढ़ती संख्या केवल एक प्रजाति की वापसी नहीं, बल्कि भारत के संरक्षण प्रयासों की व्यापक सफलता का प्रतीक बन चुकी है। कूनो में जन्मे नए शावक इस ऐतिहासिक अभियान को नई ऊर्जा दे रहे हैं।
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