तीसरे वित्तीय बजट को मिल सकती है मंजूरी, ‘कृषि वर्ष’ और विकास रोडमैप पर रहेगा खास फोकस
भोपाल, 18 फरवरी। Mohan Yadav की अध्यक्षता में आज आयोजित मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक को प्रदेश की वित्तीय और नीतिगत दिशा तय करने वाली अहम बैठक माना जा रहा है। इस बैठक में लगभग 4.70 लाख करोड़ रुपये के राज्य बजट को अंतिम मंजूरी दी जा सकती है। इसके बाद Jagdish Devda विधानसभा में इसे प्रस्तुत करेंगे। यह प्रदेश सरकार का तीसरा पूर्ण वित्तीय बजट होगा, जिसे आगामी वर्षों की विकास रणनीति का आधार माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग द्वारा तैयार किए गए बजट मसौदे पर पहले ही विस्तृत चर्चा हो चुकी है। कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति के बाद इसे सदन में पेश किया जाएगा। अनुमान है कि यह बजट पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 से 15 प्रतिशत अधिक होगा। सरकार वर्ष 2028 तक बजट को 7.28 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के अपने लक्ष्य को भी दोहरा सकती है।
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— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 18, 2026
इस बार का बजट कई मायनों में अलग और तकनीकी रूप से उन्नत होगा। इसे प्रदेश का पहला ‘पेपरलेस’ बजट बताया जा रहा है। पारंपरिक ब्रीफकेस की जगह वित्त मंत्री टैबलेट के माध्यम से बजट प्रस्तुत करेंगे। यह पहल शासन में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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तीन वर्ष का विकास रोडमैप और ‘कृषि वर्ष’ की घोषणा
सरकार बजट के साथ आगामी तीन वर्षों का विस्तृत विकास रोडमैप भी प्रस्तुत कर सकती है। वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किए जाने के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधानों की संभावना है। सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण, भंडारण क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
किसानों के लिए ब्याज अनुदान, समर्थन मूल्य तंत्र को मजबूत करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसी योजनाओं पर भी वित्तीय प्रावधान किए जाने की चर्चा है। ग्रामीण सड़कों, पेयजल परियोजनाओं और विद्युत आपूर्ति के विस्तार को भी प्राथमिकता मिल सकती है, ताकि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिल सके।
इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार सृजन, नई शासकीय भर्तियों और कौशल विकास कार्यक्रमों पर भी जोर रहने की संभावना है। महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के बजटीय प्रावधानों में वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए आधारभूत ढांचे और व्यवस्थाओं हेतु विशेष राशि का प्रावधान भी संभावित है।
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नई आबकारी नीति : संरचना में बदलाव, लेकिन नई दुकानें नहीं
कैबिनेट बैठक में 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति को भी मंजूरी मिल सकती है। सरकार शराब दुकानों के आवंटन की व्यवस्था में बदलाव करते हुए उन्हें छोटे-छोटे समूहों में विभाजित कर ठेका देने की योजना पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार एक समूह में दो से पांच दुकानें शामिल होंगी। प्रदेशभर में लगभग एक हजार समूह बनाए जाने की संभावना है, जबकि राजधानी भोपाल में 25 से 30 समूह गठित किए जा सकते हैं।
आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ‘रेंडमाइजेशन सिस्टम’ लागू करने की तैयारी है। इसके तहत संगणकीकृत ड्रॉ के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि कौन-सा समूह पहले खुलेगा। इससे कथित पक्षपात और मनमानी की शिकायतों को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
नई नीति के तहत न तो नई शराब दुकानें खोली जाएंगी और न ही नए अहाते बनाए जाएंगे। वर्तमान ढांचे के भीतर ही लाइसेंस जारी किए जाएंगे। होटल-बार लाइसेंस के लिए न्यूनतम कमरों की संख्या 20 से घटाकर 10 किए जाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, जिससे छोटे शहरों और कस्बों के होटल व्यवसायियों को राहत मिल सकती है।
सरकार फिलहाल आबकारी शुल्क बढ़ाने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही है। विभाग को 31 मार्च तक लगभग 18 हजार करोड़ रुपये का राजस्व एकत्रित करने का लक्ष्य है। आगामी वित्तीय वर्ष में इसमें 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है। आबकारी नीति में संरचनात्मक सुधार के माध्यम से राजस्व वृद्धि का प्रयास किया जाएगा, न कि दरों में सीधी बढ़ोतरी के जरिए।
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आर्थिक संतुलन और विकास की दिशा
यह बजट राज्य की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रह और व्यय प्रबंधन के संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एक ओर सरकार विकास परियोजनाओं को गति देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना भी प्राथमिकता में है। सामाजिक क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने के साथ-साथ निवेश आकर्षित करने की रणनीति भी बजट में झलक सकती है।
कैबिनेट की इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगी। यदि प्रस्तावित बजट और नई आबकारी नीति को हरी झंडी मिलती है, तो प्रदेश की आर्थिक संरचना में कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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