मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद राकांपा एपी ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
मुंबई, 17 फरवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की औपचारिक मांग की। इस मुलाकात के दौरान राकांपा एपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे, मंत्री हसन मुश्रीफ और पार्थ पवार भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद राकांपा एपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पत्रकारों से कहा कि अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत के बाद कई तरह की शंकाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता इस दुखद घटना की सच्चाई जानना चाहती है और इसलिए इसकी गहन छानबीन आवश्यक है। तटकरे के अनुसार, सभी तथ्यों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी से कराना समय की मांग है, ताकि किसी भी प्रकार का संदेह शेष न रहे।
राज्य सरकार केंद्रीय गृह मंत्री को लिखेगी पत्र
तटकरे ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री को इस संबंध में पत्र लिखेंगे। उन्होंने कहा कि जिस दिन यह विमान हादसा हुआ, उस दिन संबंधित विभाग के केंद्रीय उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और मुरलीधर मोहोल मौके पर मौजूद थे। केंद्र सरकार ने इस दुखद दुर्घटना के तुरंत बाद एक स्वायत्त निकाय की नियुक्ति कर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
हालांकि राकांपा एपी का मत है कि घटना की संवेदनशीलता और उससे जुड़े सार्वजनिक हित को देखते हुए जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए। तटकरे ने कहा कि स्वायत्त निकाय द्वारा जांच किए जाने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर बाहरी दुर्घटना अन्वेषकों की भी सहायता ली जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी तथ्य और मुद्दे सामने आएं, उन्हें राज्य और देश की जनता के समक्ष पारदर्शी रूप से रखा जाना चाहिए।
राजनीतिक और जनभावनात्मक महत्व
अजित पवार के निधन ने राज्य की राजनीति में गहरा असर डाला है। उनके समर्थकों और आम नागरिकों के बीच घटना को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। ऐसे में उच्च स्तरीय जांच की मांग को राजनीतिक और जनभावनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुनेत्रा पवार की यह पहल संकेत देती है कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां आगे क्या निर्णय लेती हैं और जांच की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय स्तर पर पत्राचार के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
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