इंदौर में बोरिंग का पानी भी जहरीला, फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया से बढ़ा खतरा

देश का सबसे साफ शहर का टैग हासिल करने वाला शहर इंदौर इन दिनों गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई है। कुछ लोगों की मौत हो चुकी है, और कई मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं।

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जांच के रिपोर्ट में सामने आया है कि पानी में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया मौजूद है, जिसके कारण से हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। इससे पहले नर्मदा जल में गंदगी मिलने की पुष्टि हुई थी और अब यह बैक्टीरिया बोरिंग के पानी तक भी पहुंच चुका है।

पानी के करीब 69 में से 35 सैंपल फेल

नगर निगम द्वारा बोरिंग के पानी के 69 सैंपल लिए गए थे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि, इनमें से 35 सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। ये सैंपल मूसाखेड़ी स्थित नगर निगम लैब में जांचे गए, जहां उनमें फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई।

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कैसे फैल रहा है बैक्टीरिया?

विशेषज्ञों का कहना है कि फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया आमतौर पर सीवेज ओवरफ्लो, खराब सेप्टिक टैंक या बिना ट्रीटमेंट वाले गंदे पानी के कारण फैलता है। आशंका जताई जा रही है कि ड्रेनेज लाइन से सीवेज लीक होकर बोरिंग के पानी में मिल रहा है, जिससे पानी दूषित हो गया।

फीकल कोलिफार्म से होने वाले खतरे

दूषित पानी पीने से शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है। इससे आंतों में सूजन, डिहाइड्रेशन के कारण किडनी खराब होने का खतरा, लिवर में संक्रमण और गंभीर मामलों में दिमाग पर असर पड़ सकता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

इंदौर: बोरिंग के पानी में भी घुला जहर, 69 में से 35 सैंपल फेल; क्यों खतरनाक  है फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया? - indore water crisis borewell contaminated  fecal coliform found

150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती

इंदौर के भागीरथीपुरा इलाके में लगभग 600 से ज्यादा बोरिंग हैं, जिन पर बड़ी संख्या में लोग पानी के लिए निर्भर हैं। दूषित पानी पीने से कई लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई है। अब तक 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। इनमें से कुल 20 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें ICU में रखा गया है।

प्रशासन की तरफ से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और लोगों से अपील की गई है कि जांच पूरी होने तक बोरिंग का पानी पीने से बचें।

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