जिला कलेक्टरों पर सटीक गणना, पारदर्शिता और शांति व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी : मोहन यादव

विलंब के बाद अब नई तैयारी के साथ आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

भोपाल। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में जनगणना-2027 पर केन्द्रित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश भर से आए जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि इस बार की जनगणना पहले की तुलना में अलग और अधिक जिम्मेदारी वाली है। यह प्रक्रिया पहले निर्धारित समय पर नहीं हो सकी थी, लेकिन अब परिस्थितियां सामान्य हैं और प्रशासन को पूरी तत्परता के साथ इसे संपन्न कराना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि गणना की शुद्धता, सूक्ष्मता और अंतिम आंकड़ों की विश्वसनीयता ही भविष्य की योजनाओं की नींव तय करेगी।

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वैदिक परंपरा से लेकर वर्तमान जरूरतों तक

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज में जनगणना जैसी परंपराएं प्राचीन काल से रही हैं और समाज की संरचना को समझने का यह सशक्त माध्यम है। उन्होंने प्रकृति प्रेम और स्थानीय जीवन शैली का उल्लेख करते हुए कहा कि मजरा-टोला से लेकर दूरस्थ अंचलों तक हर व्यक्ति और हर बस्ती की सही जानकारी दर्ज होना आवश्यक है। आदिवासी इलाकों में जीवन की सहजता, बार-बार बसने-उजड़ने की स्थिति और भौगोलिक चुनौतियां प्रशासन के सामने अतिरिक्त दायित्व खड़े करती हैं। ऐसे में अधिकारियों को संवेदनशीलता और धैर्य के साथ काम करना होगा।

निचले स्तर के अमले के सामने व्यावहारिक कठिनाइयां

मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जनगणना का असली कार्य जमीनी कर्मचारियों के माध्यम से होता है। बुंदेलखंड, बघेलखंड और चंबल जैसे क्षेत्रों में भौगोलिक, सामाजिक और संपर्क संबंधी कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं। इसलिए आंकड़ों का मिलान और पुनः जांच आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे इस पूरी प्रक्रिया को गंभीरता से लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद या भ्रम की स्थिति न बने।

राजनीतिक और प्रशासनिक निष्पक्षता जरूरी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनगणना सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील विषय है। जब अंतिम आंकड़े सामने आएं, तब निष्पक्षता और पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे, यह सुनिश्चित करना होगा। विधानसभा सत्र निकट होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर किसी भी प्रकार के विवाद से बचना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधियों के प्रश्नों का उत्तर भी इन्हीं आंकड़ों के आधार पर दिया जाएगा, इसलिए त्रुटि की कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए।

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विकास कार्यों में बाधाएं दूर करने के निर्देश

सम्मेलन में जल संरचनाओं और अन्य निर्माण कार्यों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं अड़चन आती है तो उसे केवल सतही तौर पर निपटाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर स्थायी समाधान खोजा जाए। विकास की गति प्रभावित न हो, साथ ही स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान बना रहे, यह संतुलन बनाना प्रशासनिक कौशल की कसौटी है। समयबद्ध ढंग से समस्या की जड़ तक पहुंचना और जरूरत पड़ने पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना भी उतना ही जरूरी बताया गया।

त्योहारों के दौरान सौहार्द बनाए रखने पर जोर

मुख्यमंत्री ने आने वाले होली और शिवरात्रि जैसे बड़े पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति समितियों के साथ नियमित बैठकें की जाएं। त्योहार सामाजिक समरसता का प्रतीक हैं, इसलिए यह दिखना चाहिए कि प्रशासन दक्षता और संवेदनशीलता से काम कर रहा है। मिलावटी मिठाइयों पर रोक और रसायन मुक्त रंगों को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी अधिकारियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए।

किसानों और उपार्जन व्यवस्था पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने गेहूं उपार्जन, योजनाओं के संचालन और कृषि से जुड़े अन्य कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आने देने की बात कही। प्रदेश इस वर्ष कृषि वर्ष के रूप में कई गतिविधियां कर रहा है, ऐसे में ग्रीष्मकालीन फसलों को बढ़ावा देने, दलहन और तिलहन उत्पादन में वृद्धि तथा नरवाई की समस्या को शून्य तक लाने के प्रयास जिला स्तर पर ही सफल होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अधिकारी इस दिशा में ठोस पहल करेंगे।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक आधार पर इतनी व्यापक गणना लंबे अंतराल के बाद हो रही है। इसलिए इसकी विश्वसनीयता और सफलता पूरे प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। वित्तीय वर्ष के समापन, राजस्व लक्ष्यों और अन्य दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए जनगणना को प्राथमिकता देनी होगी। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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