मुनाफा वसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों से निवेशकों में बढ़ी घबराहट
शुरुआती कारोबार में ही टूटा बाजार का मनोबल
मुंबई। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ खुला और शुरुआती घंटों में ही बिकवाली का दबाव गहरा गया। कमजोर वैश्विक संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होने वाले संभावित व्यवधानों को लेकर बनी आशंकाओं ने निवेशकों के भरोसे को झकझोर दिया। नतीजतन प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और बाजार का रुख पूरी तरह नकारात्मक हो गया।
मुनाफा वसूली ने बढ़ाई गिरावट की रफ्तार
सुबह के कारोबार में गिरावट का दायरा इतना तेज रहा कि कुछ ही समय में सूचकांक सैकड़ों अंक नीचे फिसल गए। पिछले सत्र से जारी मुनाफा वसूली ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया। बड़े निवेशकों के साथ खुदरा निवेशक भी सतर्क नजर आए और सुरक्षित रुख अपनाते दिखे। कारोबारियों का कहना है कि जब वैश्विक बाजारों से कमजोरी के संकेत मिलते हैं, तब घरेलू बाजार में जोखिम लेने की इच्छा कम हो जाती है और यही तस्वीर शुक्रवार को भी देखने को मिली।
तकनीकी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इस क्षेत्र में पहले से ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बदलावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे भविष्य की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण निवेशकों ने इन शेयरों में तेजी से मुनाफा वसूली की। परिणामस्वरूप प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए और सूचकांक पर उनका भारी प्रभाव पड़ा।
छोटे और मझोले शेयर भी चपेट में
बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मध्यम और छोटे आकार की कंपनियों के सूचकांकों में भी तेज कमजोरी दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक व्यापक स्तर पर जोखिम कम कर रहे हैं। जिन निवेशकों ने हाल के महीनों में तेजी का लाभ उठाया था, वे अब मुनाफा सुरक्षित करने की कोशिश में हैं। इस प्रवृत्ति ने गिरावट को और गहरा कर दिया।
रुपये में कमजोरी ने बढ़ाई चिंता
मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में कमजोर हुआ और कुछ पैसे फिसल गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। जब रुपये पर दबाव बढ़ता है तो आयात लागत और महंगाई को लेकर भी चिंताएं गहरा सकती हैं, जिससे बाजार की भावना प्रभावित होती है।
चुनिंदा शेयरों में ही दिखी मजबूती
हालांकि इस व्यापक गिरावट के बीच कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती भी नजर आई। वित्तीय और दूरसंचार क्षेत्र की कुछ कंपनियां हरे निशान में रहीं, लेकिन उनका सकारात्मक असर बाजार की समग्र कमजोरी को थामने के लिए पर्याप्त नहीं था। अधिकांश क्षेत्रों में बिकवाली हावी रही और निवेशकों की नजरें आगे आने वाले वैश्विक संकेतों पर टिकी रहीं।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बाजार लगातार ऊंचे स्तरों पर पहुंचता है, तब थोड़ी सी नकारात्मक खबर भी बड़ी गिरावट की वजह बन जाती है। फिलहाल निवेशक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, विदेशी निवेश के रुख और तकनीकी क्षेत्र में संभावित बदलावों को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। यही कारण है कि जैसे ही नकारात्मक संकेत मिलते हैं, बिकवाली तेज हो जाती है।
कारोबार के शुरुआती रुझानों से यह भी संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल नई खरीदारी से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। वे बाजार में स्थिरता लौटने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक स्तर पर हालात सुधरते हैं और रुपये में मजबूती आती है, तो बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है। लेकिन जब तक अनिश्चितता बनी रहेगी, उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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