दुनिया में किसी भी देश की वैश्विक पहचान केवल उसकी अर्थव्यवस्था, सेना या तकनीकी विकास से ही निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसके पासपोर्ट की ताकत भी एक महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। पासपोर्ट की रैंकिंग यह दर्शाती है कि उस देश के नागरिक कितने देशों में बिना वीजा या सरल वीजा प्रक्रिया के साथ यात्रा कर सकते हैं। यह केवल यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विश्वास और कूटनीतिक संबंधों का प्रतिबिंब भी होती है। हाल ही में जारी वैश्विक रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट ने पांच स्थान की छलांग लगाकर 75वां स्थान हासिल किया है। यह सुधार भले मामूली दिखे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे एक सकारात्मक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं सिंगापुर ने एक बार फिर शीर्ष स्थान प्राप्त कर दुनिया के सबसे मजबूत पासपोर्ट का दर्जा बनाए रखा है, जो उसकी स्थिरता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
पासपोर्ट रैंकिंग का महत्व क्या है
पासपोर्ट रैंकिंग केवल एक क्रम संख्या नहीं होती, बल्कि यह किसी देश की कूटनीतिक क्षमता, वैश्विक सहयोग और नागरिकों को मिलने वाली स्वतंत्रता का दर्पण होती है। जब किसी देश का पासपोर्ट मजबूत होता है, तो उसके नागरिकों को यात्रा के दौरान कम औपचारिकताओं, कम समय और कम बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
यह सीधे तौर पर शिक्षा, व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के अवसरों को प्रभावित करता है। मजबूत पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की विश्वसनीयता को बढ़ाता है और वैश्विक साझेदारी के नए रास्ते खोलता है।
भारतीय पासपोर्ट में सुधार क्यों महत्वपूर्ण है
भारत का 75वें स्थान पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। कई देशों ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाया है या आगमन पर वीजा जैसी सुविधाएं दी हैं।
यह बदलाव छात्रों, व्यापारियों और पेशेवरों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। विदेश में पढ़ाई करने, काम करने या निवेश करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सहज हो सकती है। पर्यटन के क्षेत्र में भी यह सुधार लोगों को अधिक देशों की यात्रा के लिए प्रेरित करता है।
सिंगापुर क्यों है सबसे ऊपर
/filters:format(webp)/swadeshjyoti/media/media_files/2026/02/13/image-2026-02-13-13-31-18.png)
सिंगापुर का शीर्ष स्थान पर बने रहना उसकी मजबूत अर्थव्यवस्था, पारदर्शी शासन व्यवस्था और व्यापक कूटनीतिक संबंधों का परिणाम है। सिंगापुर के नागरिकों को बड़ी संख्या में देशों में बिना वीजा या आगमन पर वीजा की सुविधा मिलती है।
यह उसकी वैश्विक विश्वसनीयता और स्थिर नीति का प्रतीक है। सिंगापुर ने वर्षों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संतुलित विदेश नीति को प्राथमिकता दी है, जिसका सीधा असर उसकी पासपोर्ट रैंकिंग में दिखाई देता है।
भारतीय नागरिकों के लिए इसका क्या मतलब है
भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा धीरे-धीरे आसान हो रही है। छात्रों के लिए विदेश में प्रवेश प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है, जिससे शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा।
व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में भी यह सकारात्मक संकेत है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, व्यावसायिक बैठकों और साझेदारी कार्यक्रमों में भाग लेना पहले की तुलना में सरल हो सकता है। इससे वैश्विक नेटवर्किंग के अवसर बढ़ते हैं।
क्या यह बदलाव स्थायी रहेगा
पासपोर्ट रैंकिंग कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कूटनीतिक संबंध, सुरक्षा मानक, अंतरराष्ट्रीय समझौते और वैश्विक विश्वास। यदि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को निरंतर मजबूत करता है और वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभाता है, तो आने वाले वर्षों में और सुधार संभव है।
स्थायी प्रगति के लिए नीति निरंतरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
शिक्षा और रोजगार पर प्रभाव
विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह सुधार महत्वपूर्ण है। सरल वीजा नियम और कम औपचारिकताएं शिक्षा को अधिक सुलभ बनाती हैं।
रोजगार के क्षेत्र में भी कंपनियां ऐसे देशों के नागरिकों को प्राथमिकता देती हैं जिनकी यात्रा प्रक्रिया सरल होती है। इससे वैश्विक अवसरों का दायरा विस्तृत होता है और पेशेवर विकास की संभावनाएं बढ़ती हैं।
पर्यटन उद्योग को लाभ
पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार से पर्यटन उद्योग को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। जब यात्रा प्रक्रिया सरल होती है, तो लोग अधिक देशों की यात्रा करने के लिए प्रेरित होते हैं।
यह व्यक्तिगत अनुभवों को समृद्ध करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देता है।
भारत की वैश्विक छवि में सुधार
पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार देश की वैश्विक छवि को मजबूत करता है। यह संकेत देता है कि भारत विश्व मंच पर एक विश्वसनीय और जिम्मेदार साझेदार के रूप में उभर रहा है।
इससे विदेशी निवेश, व्यापारिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों में भी वृद्धि होती है। मजबूत छवि लंबे समय में आर्थिक और कूटनीतिक लाभ देती है।
आगे क्या करना होगा
भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति को और मजबूत बनाना होगा। अधिक देशों के साथ पारस्परिक वीजा छूट समझौते और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से रैंकिंग में और सुधार संभव है।
सुरक्षा मानकों, दस्तावेज प्रणाली और तकनीकी ढांचे को भी आधुनिक बनाए रखना आवश्यक है, ताकि वैश्विक विश्वास और मजबूत हो सके।
निष्कर्ष
भारतीय पासपोर्ट का 75वें स्थान पर पहुंचना एक सकारात्मक कदम है। यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। हालांकि अभी शीर्ष स्थान दूर है, लेकिन यह सुधार भविष्य के लिए आशा की किरण है।
सिंगापुर शीर्ष पर बना हुआ है, लेकिन भारत भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। यह बदलाव केवल यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि वैश्विक अवसरों के विस्तार का प्रतीक है।
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/02/13/image-2026-02-13-12-01-13.png)