केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने तीन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से छोड़ा, पुनर्बसाहट अभियान को बताया ऐतिहासिक
भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में शनिवार को बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों का आगमन हुआ। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने इनमें से तीन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बोत्सवाना और भारत के बीच जैव विविधता संरक्षण की यह साझेदारी ऐतिहासिक है और यह चीतों की पुनर्बसाहट की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल और प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापन योजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को शुरू हुए साढ़े तीन वर्ष हो चुके हैं और कूनो में चीतों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। बोत्सवाना से आए नौ नए चीतों के साथ देश में कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है, जिनमें 45 कूनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं।
एक समय एशिया से विलुप्त हो चुके चीते अब भारत की धरती पर रफ्तार भर रहे हैं। मध्यप्रदेश, देश में चीतों का एकमात्र घर है, जहां विशेष प्रयासों के तहत बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को आज माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री @byadavbjp जी ने श्योपुर के कूनो नेशनल… pic.twitter.com/ctJ2ieywZL
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 28, 2026
6 मादा और 3 नर चीते, 12 घंटे की हवाई यात्रा
बोत्सवाना से लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद ये नौ चीते शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे कूनो पहुंचे। ग्वालियर हवाई अड्डे से वायुसेना के तीन हेलीकॉप्टरों के माध्यम से इन्हें एयरलिफ्ट कर कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया। इन नौ चीतों में छह मादा और तीन नर शामिल हैं। नए चीतों के जुड़ने से वयस्क चीतों की संख्या 35 हो गई है, जिनमें 18 मादा और 17 नर हैं।
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कूनो पहुंचने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत चीतों को पहले क्वारंटीन बाड़ों में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद उन्हें खुले जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सभी चीते स्वस्थ हैं और उनकी निगरानी के लिए विशेष दल तैनात किया गया है।
जैव विविधता संरक्षण में वैश्विक सहयोग
भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत का चीता प्रोजेक्ट केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए एक उदाहरण बन रहा है। उन्होंने बताया कि भारत के प्रयासों से 97 देश इस मंच से जुड़े हैं और वन्यजीव संरक्षण के लिए सहयोग कर रहे हैं। बोत्सवाना से चीतों का आगमन इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कड़ी को और मजबूत करता है।
इस अवसर पर प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तुरसनपाल बरैया, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, भारत सरकार के डीजी वन्यजीव सुशील कुमार अवस्थी, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएन अंबाडे और चंबल संभाग के आयुक्त सुरेश कुमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
कूनो की पारिस्थितिकी और बढ़ता कुनबा
अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है। यहां 174 प्रजातियों के पक्षी और सैकड़ों वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं। चीतों की पुनर्बसाहट से इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करने में मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष शिकारी के रूप में चीते घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 48 होना वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कूनो में चीतों का बढ़ता परिवार इस बात का संकेत है कि पुनर्बसाहट योजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इन चीतों के प्राकृतिक वातावरण में पूरी तरह ढलने और प्रजनन करने से संख्या में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।
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