ईरान ने नौ देशों में बने अमेरिकी ठिकानों पर किया पलटवार, श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला, 87 नौसैनिकों की मौत
तेल अवीव/तेहरान : अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस संघर्ष का आज छठा दिन है और ईरान पर अमेरिकी हमलों के लगभग 100 घंटे पूरे हो चुके हैं। इस दौरान अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार अब तक 5000 से अधिक मिसाइलों और बमों से ईरान को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में ईरान के 20 युद्धपोत भी डुबो दिए गए हैं। लगातार जारी सैन्य कार्रवाई में अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं।
इस बढ़ते सैन्य संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र को गंभीर अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो यह युद्ध और अधिक देशों को अपनी चपेट में ले सकता है।
ईरान का पलटवार : नौ देशों में बने अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिका और इजराइल के लगातार हमलों के बाद ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया है। ईरान ने पश्चिम एशिया के नौ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं तो इसका गंभीर परिणाम होगा। एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान दक्षिणी इजराइल में स्थित डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बना सकता है। यह इजराइल का अत्यंत संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठान माना जाता है।
ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार अधिकारी ने कहा कि यदि ईरान की संप्रभुता और राजनीतिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाया गया तो ईरान अपनी पूरी सैन्य क्षमता के साथ जवाब देगा।
लेबनान में शरणार्थी कैंप पर इजराइली हमला
इस बीच इजराइल ने लेबनान के त्रिपोली शहर के पास स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप पर भी हमला किया है। रिपोर्ट के अनुसार यह हमला उत्तरी लेबनान के सबसे बड़े फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप बद्दावी में किया गया।
बताया जा रहा है कि तड़के किए गए इस हमले में एक ड्रोन ने एक घर को निशाना बनाया। इस हमले में हमास से जुड़े नेता वसीम अतल्लाह अल-अली और उनकी पत्नी की मौत हो गई। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है।
इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है तथा फिलिस्तीनी समूहों ने इजराइल के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला
युद्ध के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में भी एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को श्रीलंका के पास निशाना बनाकर डुबो दिया। इस हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है।
श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार यह हमला दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 40 समुद्री मील दूर हुआ। अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो के माध्यम से इस युद्धपोत को निशाना बनाया।
जहाज पर लगभग 180 नौसैनिक सवार थे। श्रीलंका की नौसेना ने बचाव अभियान चलाकर 32 घायल नौसैनिकों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। कई नौसैनिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश के लिए सर्च अभियान जारी है।
बताया गया है कि यह ईरानी युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक समारोह में भाग लेने के बाद वापस लौट रहा था।
अमेरिकी संसद में ईरान पर हमले रोकने का प्रस्ताव खारिज
युद्ध के बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई से रोकने के लिए एक प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
मतदान में प्रस्ताव के समर्थन में 47 वोट पड़े जबकि 53 सीनेटरों ने इसका विरोध किया। आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण प्रस्ताव असफल हो गया।
इस मतदान में पेंसिल्वेनिया के सीनेटर जॉन फेटरमैन प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाले एकमात्र डेमोक्रेट थे, जबकि केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करने वाले अकेले रिपब्लिकन रहे।
अमेरिका ने परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइल का परीक्षण किया
इसी दौरान अमेरिका ने अपनी परमाणु क्षमता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मिसाइल का परीक्षण भी किया है। कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनटमैन थर्ड नामक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया गया।
यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और अमेरिका की परमाणु रणनीति का एक अहम हिस्सा मानी जाती है। परीक्षण के दौरान इस मिसाइल को प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप समूह के पास निर्धारित लक्ष्य की ओर भेजा गया और यह हजारों किलोमीटर की उड़ान के बाद अपने लक्ष्य पर सटीकता से पहुंची।
मिनटमैन थर्ड मिसाइल को पहली बार 1970 में तैनात किया गया था। वर्तमान में अमेरिका के पास लगभग 400 ऐसी मिसाइलें हैं जो तीन प्रमुख वायुसेना अड्डों पर तैनात हैं। यह मिसाइल लगभग 13,000 किलोमीटर तक मार कर सकती है और इसमें तीन अलग-अलग परमाणु वारहेड लगाए जा सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक नियमित सैन्य परीक्षण था और इसका ईरान-इजराइल युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है।
तेहरान में भारी तबाही का वीडियो जारी
अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरानी सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने तेहरान में हुए नुकसान का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में कई इमारतें पूरी तरह मलबे में तब्दील दिखाई दे रही हैं।
वीडियो में कुछ लोग अपने घरों के मलबे के बीच खड़े नजर आ रहे हैं और आसपास तबाही का दृश्य दिखाई देता है। इन तस्वीरों ने युद्ध की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया है।
जंग के कारण यूएई में स्कूल-कॉलेजों की छुट्टियां
युद्ध का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है। संयुक्त अरब अमीरात की सरकार ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए स्कूलों और विश्वविद्यालयों में बसंत की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं।
सरकार के अनुसार इस बार छुट्टियां 9 मार्च से 22 मार्च तक रहेंगी और 23 मार्च से कक्षाएं दोबारा शुरू होंगी। यह निर्णय देश के सभी सार्वजनिक और निजी स्कूलों तथा विश्वविद्यालयों पर लागू होगा।
पहले तय कार्यक्रम के अनुसार ये छुट्टियां 16 मार्च से 29 मार्च तक निर्धारित थीं, लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकार ने इसे पहले शुरू करने का फैसला किया है। इससे पहले सरकार ने 6 मार्च तक पूरे देश में ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखने का भी आदेश दिया था।
पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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