बंदर अब्बास के पास आईआरजीसी नौसैनिक अड्डे के निकट विस्फोट, ईरान ने दी चेतावनी : फारस की खाड़ी में अमेरिकी-ब्रिटिश जहाजों को बनाएंगे निशाना

तेहरान/वाशिंगटन/तेल अवीव : पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान की सफलता पर संतोष जताते हुए बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अब तक की सैन्य कार्रवाई से उन्हें संतोष है और यदि संघर्ष आगे बढ़ता है तो ईरान के अगले नेता की भी मौत हो सकती है। उनके इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

ईरान इंटरनेशनल समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि युद्ध जारी रहता है तो ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी भी निशाने पर आ सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।

ईरान के नौसैनिक अड्डे के पास जोरदार धमाके

इसी बीच ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसैनिक अड्डे के पास जोरदार विस्फोट होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह धमाके आईआरजीसी के प्रथम नौसैनिक क्षेत्र में बंदर-ए-बहोनार के आसपास हुए हैं। यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे नजदीक स्थित सैन्य इकाइयों में शामिल है।

इजराइल की रक्षा सेना ने भी दावा किया है कि उसने ईरान में एक महत्वपूर्ण सैन्य परिसर के खिलाफ बड़ा अभियान पूरा किया है। इस कार्रवाई में ईरान के कई सैन्य मुख्यालयों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया है। इजराइली सेना के अनुसार इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था।

ईरान की कड़ी चेतावनी : जहाजों को बनाएंगे निशाना

इन हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नौसेना के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा कि अब फारस की खाड़ी में अमेरिकी और ब्रिटिश जहाजों के साथ-साथ इजराइल के लिए सामान ले जाने वाले हर जहाज को निशाना बनाया जाएगा।

कमांडर ने कहा कि ऐसे जहाजों पर चाहे किसी भी देश का झंडा लगा हो, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इस बयान से संकेत मिलता है कि फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में तनाव और बढ़ सकता है।

इस बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि अल-खारज क्षेत्र के पूर्व में तीन ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया गया। माना जा रहा है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय तनाव से जुड़े घटनाक्रम का हिस्सा हो सकते हैं।

श्रीलंका के पास डुबोए गए युद्धपोत पर ईरान की प्रतिक्रिया

हिंद महासागर में श्रीलंका के पास डुबोए गए ईरानी युद्धपोत की घटना को लेकर भी ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह समुद्र में किया गया अन्याय है।

उन्होंने सामाजिक माध्यम पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान के तटों से लगभग दो हजार मील दूर समुद्र में हमला किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को अपने इस कदम पर भारी पछतावा होगा।

ईरान की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिल रहे हैं कि समुद्री मार्गों में भी संघर्ष और बढ़ सकता है।

ट्रंप ने नाटो महासचिव को दिया धन्यवाद

जंग के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को सामाजिक माध्यम पर नाटो महासचिव मार्क रूट को धन्यवाद दिया। उन्होंने एक रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिका के सहयोगी देश ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान का बड़े पैमाने पर समर्थन कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि कई मित्र राष्ट्र अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को समर्थन दे रहे हैं और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक मानते हैं।

खामेनेई के परिवार को लेकर चर्चा

इस संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार को लेकर भी कई खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार युद्ध में खामेनेई के परिवार के कई सदस्य और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं।

खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को लंबे समय से उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। 56 वर्षीय मोजतबा शिया धर्मगुरु हैं और पिछले कई वर्षों से ईरान की राजनीति तथा सुरक्षा मामलों में पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का मजबूत समर्थन भी प्राप्त है।

हालांकि कुछ समय पहले यह खबर भी सामने आई थी कि मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है, लेकिन ईरानी सरकार ने इन खबरों का खंडन किया और कहा कि आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जाना चाहिए।

क्षेत्र में बढ़ती जा रही युद्ध की आशंका

पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य हमलों और तीखी बयानबाजी के कारण क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह जारी रहा तो इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी पड़ सकता है।

दुनिया भर के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

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