एहतियातन लिया गया वापस लौटने का फैसला, व्हाइट हाउस ने बताई मामूली विद्युत तकनीकी समस्या

दावोस। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्विट्जरलैंड दौरे से पहले उस समय हलचल मच गई, जब उन्हें दावोस ले जा रहा राष्ट्रपति विमान एयर फोर्स वन उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद ही बीच रास्ते से वापस लौट आया। यह घटना मंगलवार शाम की है, जब राष्ट्रपति ट्रंप दावोस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अमेरिका से रवाना हुए थे।

जानकारी के अनुसार, विमान ने वॉशिंगटन डीसी के पास स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज से उड़ान भरी थी। उड़ान के कुछ समय बाद ही विमान में तकनीकी खराबी के संकेत मिलने लगे, जिसके बाद सुरक्षा और एहतियात को प्राथमिकता देते हुए विमान को वापस उसी बेस पर उतारने का निर्णय लिया गया। यह फैसला उड़ान के लगभग एक घंटे के भीतर लिया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

उड़ान के दौरान सामने आई विद्युत तकनीकी समस्या

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उड़ान के बाद विमान में एक मामूली विद्युत तकनीकी समस्या सामने आई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई बड़ी या गंभीर खराबी नहीं थी, लेकिन फिर भी सुरक्षा मानकों के तहत विमान को वापस लाने का फैसला किया गया।

प्रेस सचिव के अनुसार, राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़े हर पहलू में अत्यधिक सतर्कता बरती जाती है और तकनीकी दृष्टि से थोड़ी सी भी असामान्यता को नजरअंदाज नहीं किया जाता। इसी नीति के तहत एयर फोर्स वन को बीच रास्ते से वापस मोड़ दिया गया।

प्रेस केबिन की लाइट बंद होने से बढ़ी चिंता

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, टेकऑफ के कुछ देर बाद विमान के प्रेस केबिन की लाइट्स कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं। हालांकि, उस समय इस बारे में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया था। विमान में सवार पत्रकारों को शुरुआत में यह नहीं बताया गया कि आखिर क्या समस्या आई है, लेकिन लगभग आधे घंटे बाद उन्हें सूचित किया गया कि विमान वापस लौट रहा है।

इस दौरान विमान के भीतर किसी प्रकार की अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनी और उड़ान पूरी तरह नियंत्रित रही। पायलट और तकनीकी दल ने सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विमान को सुरक्षित रूप से वापस लाने की प्रक्रिया पूरी की।

सुरक्षित लैंडिंग, कोई खतरा नहीं

एयर फोर्स वन को सुरक्षित रूप से वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में उतार लिया गया। व्हाइट हाउस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस घटना में किसी प्रकार का खतरा नहीं था और न ही राष्ट्रपति या उनके साथ मौजूद प्रतिनिधिमंडल को कोई नुकसान पहुंचा।

अमेरिकी प्रशासन ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति विमान में मौजूद सभी सुरक्षा और तकनीकी प्रणालियां अत्यंत उन्नत हैं, जिनका उद्देश्य किसी भी संभावित जोखिम को पहले ही पहचान लेना और समय रहते आवश्यक कदम उठाना होता है। इसी कारण मामूली तकनीकी समस्या के बावजूद उड़ान को जारी रखने के बजाय वापस लौटना बेहतर समझा गया।

बैकअप विमान से रवाना हुए राष्ट्रपति

एयर फोर्स वन के वापस लौटने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यक्रम में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था की गई। इसके तहत राष्ट्रपति और उनके दल को एक बैकअप विमान से स्विट्जरलैंड के लिए रवाना किया गया।

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा जांच और तकनीकी पुष्टि के बाद बैकअप विमान से उड़ान भरी गई, ताकि राष्ट्रपति समय पर दावोस पहुंच सकें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और व्हाइट हाउस का स्टाफ पूरी तरह सतर्क रहा।

दावोस यात्रा का महत्व

राष्ट्रपति ट्रंप की दावोस यात्रा अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दावोस में होने वाले वैश्विक स्तर के कार्यक्रमों में दुनिया भर के नेता, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। ऐसे मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से अहम माना जाता है।

यही कारण है कि तकनीकी बाधा के बावजूद यात्रा को रद्द करने के बजाय वैकल्पिक विमान से रवाना होने का फैसला लिया गया। इससे यह संकेत भी मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को लेकर कितनी गंभीरता रखता है।

पहले भी सामने आ चुकी हैं तकनीकी दिक्कतें

यह पहला मौका नहीं है जब किसी वीआईपी विमान में तकनीकी समस्या सामने आई हो। इससे पहले भी दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के विमानों में तकनीकी खामियां रिपोर्ट की जा चुकी हैं, जिनके चलते उड़ान रद्द या स्थगित करनी पड़ी है। ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एहतियातन कदम उठाना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक विमानों में तकनीकी चेतावनी प्रणालियां अत्यंत संवेदनशील होती हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही पहचाना जा सके। यही वजह है कि कई बार मामूली समस्या भी बड़े फैसले का कारण बन जाती है।

सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का संदेश

एयर फोर्स वन की इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। चाहे समस्या कितनी भी छोटी क्यों न हो, जोखिम लेने के बजाय सुरक्षित विकल्प चुना जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद व्हाइट हाउस ने यह भी भरोसा दिलाया कि राष्ट्रपति की यात्रा और कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी तरह की तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हैं।

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