लगातार तीसरे दिन शेयर बाजार में भारी बिकवाली, वैश्विक तनाव और कमजोर तिमाही नतीजों का असर

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर भारी दबाव देखने को मिला। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही तेज गिरावट के साथ लुढ़क गया। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 1000 अंक तक टूट गया और 81,124 के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि दिन के मध्य सत्र में कुछ संभलने की कोशिश जरूर दिखी, लेकिन सेंसेक्स अब भी करीब 600 अंक यानी लगभग 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,600 के आसपास कारोबार करता दिखा।

वहीं दूसरी ओर एनएसई निफ्टी में भी कमजोरी हावी रही। निफ्टी करीब 200 अंक यानी लगभग 0.80 प्रतिशत गिरकर 25,000 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में जारी इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब बीते तीन कारोबारी सत्रों में कुल मिलाकर सेंसेक्स लगभग 3000 अंक तक टूट चुका है।

लगातार तीसरे दिन गिरावट, बाजार की धारणा कमजोर

बीते दो दिनों में ही बाजार 2000 से अधिक अंक गंवा चुका था और मंगलवार को सेंसेक्स में 1065 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। बुधवार को भी इसी रुझान का विस्तार देखने को मिला। जानकारों के अनुसार यह गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आ रहे नकारात्मक संकेत भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 5 शेयरों में मामूली तेजी देखी गई, जबकि 25 शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। यह आंकड़ा अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

बैंकिंग, ऑटो, आईटी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

बुधवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, ऑटो, मीडिया, रियल्टी और आईटी सेक्टर के शेयरों में देखा गया। खासकर बैंकिंग शेयरों में आई कमजोरी ने बाजार को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई। निजी और सरकारी दोनों ही बैंकों के शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों की धारणा और कमजोर हुई।

आईटी सेक्टर पर भी दबाव बना रहा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और अमेरिका तथा यूरोप से आने वाले कमजोर संकेतों का सीधा असर आईटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। ऑटो और रियल्टी शेयरों में भी मांग कमजोर रही, जिससे इन सेक्टरों के सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।

वैश्विक राजनीति का असर: ट्रम्प के बयान से बढ़ी अनिश्चितता

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के पीछे एक बड़ी वजह वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता है। खास तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर ट्रम्प की जिद और बयानबाजी से वैश्विक निवेशकों में चिंता का माहौल बना हुआ है।

इसका असर केवल अमेरिकी बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उभरते बाजारों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है।

कमजोर तिमाही नतीजे भी बने गिरावट की वजह

घरेलू स्तर पर भी कुछ नकारात्मक संकेत सामने आए हैं। तीसरी तिमाही के नतीजों में कई बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा है। बाजार सूत्रों के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी दिग्गज कंपनी के मुनाफे में कमी की खबरों ने भी निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला है।

जब बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों के नतीजे कमजोर रहते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। निवेशक ऐसी स्थिति में जोखिम लेने से बचते हैं और मुनाफावसूली या पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, जिससे बाजार में गिरावट तेज हो जाती है।

निवेशकों में बढ़ी सतर्कता, आगे क्या?

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी बाजारों की चाल और आगामी दिनों में आने वाले तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और घरेलू कंपनियों के नतीजे बेहतर आते हैं, तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है।

हालांकि, मौजूदा हालात में उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक घबराहट में फैसले लेने से बचें और बाजार की बुनियादी मजबूती पर ध्यान दें।

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