प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही दो दिनी इजराइल के दौरे पर जाने वाले हैं, इसकी जानकारी 22 फरवरी को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया पर साझा की, उन्होंने लिखा-
“मैंने अपने प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी बुधवार को इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा के बारे में बात की। इजराइल और भारत के बीच का संबंध दो वैश्विक नेताओं का एक सशक्त गठबंधन है। हम नवाचार, सुरक्षा और साझा राजनीतिक दृष्टिकोण में भागीदार हैं। साथ मिलकर, हम स्थिरता और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध राष्ट्रों का एक गठबंधन बना रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्षेत्रीय सहयोग तक, हमारी साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। यरूशलम में आपसे मिलने की प्रतीक्षा रहेगी, प्रधानमंत्री मोदी!“
इजराइल की यात्रा करने वाले पहले पीएम है मोदी
इससे पहले मोदी ने जुलाई 2017 में इजराइल की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री मोदी इजरायल का अधिकारिक दौरा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
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इजरायल में क्या क्या होगा
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा दो दिवसीय होगी, इसमें वे इजराइल की राजधानी यरूशलम में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे, मोदी इजरायली पीएम के साथ होलोकॉस्ट स्मारक पर ‘याद वाशेम’ पर भी जाएंगे जहां इस घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देंगे। राजधानी में कई सारी अहम बैठकें होंगी जिनमें रक्षा सौदे, तकनीकी आदान-प्रदान, एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं।
- 2026 में इजरायल ने भारत के साथ करीब 71,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के हथियार सौदों पर सहमति जताई है।
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का भारत दौरा क्यों टला?
नवंबर 2025 में कुछ इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से ये कहा गया था कि दिसंबर में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत का दौरा करने वाले हैं। नवंबर में ही भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने इजरायल की यात्रा की थी। इसे नेतन्याहू की भारत दौरे से पहले की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा था।
हालांकि अचानक नेतन्याहू का भारत दौरा रद्द होने की खबरें आईं। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स, खास तौर पर i24NEWS ने कहा कि 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास बम धमाकों के चलते सुरक्षा कारणों के चलते नेतन्याहू के दौरे का प्लान बदल गया। भारत सरकार के द्वारा कहा गया था उनकी यात्रा को दिल्ली ब्लास्ट से जोड़ना ठीक नही।
प्रधानमंत्री मोदी क्यों जा रहे हैं इजराइल ?
india israel relations: विदेशी मामलों के जानकार हर्ष वी. पंत कहते हैं, 'मिडिल ईस्ट में लगातार चल रहे तनाव को देखते हुए शायद यह ज्यादा उपयुक्त माना गया कि नेतन्याहू के आने के बजाय पीएम मोदी इजराइल जाएं, क्योंकि उस इलाके में जो कुछ हो रहा है, उसके बीच दोनों नेताओं की मीटिंग और बातचीत जरूरी थी।'
ईरान पर हमले के आसार के बीच मोदी के दौरे के क्या मायने
अमेरिकी नेवी ने ईरान को घेर रखा है, उसने अपने लगभग 40 हजार से अधिक सैनिक ईरान के आसपास युद्धपोतों पर तैनात कर रखे हैं । इतना ही नहीं अमेरिका ने 2 एयरक्राफ्ट कैरियर समेत 14 वॉरशिप्स तैनात किए हैं।
दूसरी तरफ ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह अमेरिकी अड्डों और इजराइल पर मिसाइल से हमला करेगा। इसी तनाव के चलते मध्य पूर्व के देशों में भी जंग की आशंका है।
इसी बीच इजराइल भी अपनी तैयारी कर रहा है। जियोपॉलिटिक्स के जानकार और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च यानी में स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर ब्रह्म चेलानी कहते हैं कि ईरान पर हमला हुआ, तो इजराइल भी निश्चित तौर पर एक बड़े संघर्ष में पड़ जाएगा।
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संयोग नही, ब्लकि सोची समझी रणनीति है मोदी का दौरा
ब्रह्म चेलानी कहते हैं, 'प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा भले ही जोखिम भरी लगती हो, लेकिन ये संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। इसके पीछे इरादा भारत के बढ़ते जियो-पॉलिटिकल प्रभाव को हाईलाइट करना है। पीएम मोदी मिडिल ईस्ट में भारत को एक महत्वपूर्ण पक्ष की तरह दिखाना चाहते हैं। इजराइली संसद में उनके भाषण से ये बात और पुख्ता होगी कि भारत इलाके के तनाव से विचलित नहीं है।
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- आज की विदेश नीति में पार्टनर देशों के टॉप लीडर्स के लेवल पर इंगेजमेंट जरूरी हो गया है। भारत-इजराइल के बीच काफी समय से ऐसी उच्च स्तरीय मीटिंग नहीं हुई थी, इस यात्रा का उद्देश्य इसी खालीपन को भरना है।
- इजराइली संसद में पीएम मोदी का भाषण खास है। ये बीजेपी के दौर में भारत-इजराइल संबंधों में आए बदलाव को दिखाता है। भारत की पॉलिसी अब इजराइल के समर्थन की है।
- इजराइली विपक्ष ने नेतन्याहू सरकार के खिलाफ संसद सत्र के बहिष्कार की धमकी दी है। चेलानी के मुताबिक, ऐसे में नेतन्याहू के लिए मोदी की मेजबानी करना निजी तौर पर फायदेमंद है।
- इस यात्रा को दोनों देशों के बीच किसी डील की घोषणा से ज्यादा एक रणनीतिक कदम की तरह देखा जाना चाहिए, क्योंकि इस इलाके से भारत के आर्थिक हित जुड़े हैं। भारत के लिए ये इलाका तेल, समुद्री व्यापार और मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीय लोगों के चलते बहुत जरूरी है।
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