सुप्रीम कोर्ट ने कहा: कुत्ते इंसानी डर पहचानते हैं, इसलिए काटते हैं
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर लगातार सुनवाई चल रही है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन करीब ढाई घंटे तक इस मामले पर बहस हुई। कोर्ट में कुत्तों के व्यवहार और उनसे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई।
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इस दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचान लेते हैं और इसी वजह से वे काटते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपने अनुभव से यह बात कह रहा हूं।”
पशु कल्याण की ओर से पक्ष रख रहे एडवोकेट सीयू सिंह ने दलील दी कि अगर कुत्तों को हटाया गया, तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जज ने कहा, “तो बिल्लियां ले आइए।”
एडवोकेट सीयू सिंह ने यह भी कहा कि अगर कुत्तों को एक ही शेल्टर होम में रखा गया, तो वे कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए देशभर में कुत्तों के लिए 91,800 नए शेल्टर होम बनाए जाने चाहिए।
सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने कोर्ट को बताया कि आखिरी बार कुत्तों की मॉनिटरिंग साल 2009 में हुई थी। उस समय दिल्ली में करीब 5,60,000 आवारा कुत्ते थे, लेकिन अब इनकी संख्या और बढ़ चुकी है। इसलिए दोबारा मॉनिटरिंग जरूरी है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्यों की तरफ से यह साफ नहीं बताया गया है कि नगर पालिकाएं कितने शेल्टर होम चला रही हैं। पूरे देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर हैं और हर एक में करीब 100 कुत्तों की ही जगह है। ऐसे में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।
गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। साथ ही निर्देश दिया था कि इन जानवरों को तय शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए।
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