व्हाइट हाउस से रवाना होते समय दिया बयान, क्यूबा से बातचीत और संभावित बड़े कदमों के संकेत
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर अपने तीखे और आक्रामक बयानों से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान की नौसेना को “पूरी तरह नेस्तनाबूद” कर देगा और उसके मिसाइल उद्योग को “मिटा” देगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।
व्हाइट हाउस से टेक्सास रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि ईरान की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई जारी रहती है, तो अमेरिका निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हाल के दिनों में कौन-सी विशेष घटना ने उन्हें यह बयान देने के लिए प्रेरित किया।
JUST IN: 🇺🇸🇮🇷 President Trump says the US is going to "annihilate" Iran's navy and "obliterate" its missile industry. pic.twitter.com/eUUT7oNTzV
— BRICS News (@BRICSinfo) February 28, 2026
क्यूबा को लेकर ‘फ्रेंडली टेकओवर’ की टिप्पणी
ईरान पर सख्त रुख के साथ-साथ ट्रम्प ने क्यूबा को लेकर भी चौंकाने वाली टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि क्यूबा सरकार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है और अमेरिका से बातचीत कर रही है। ट्रम्प के शब्दों में, “वे बड़ी परेशानी में हैं। उनके पास संसाधन नहीं हैं। लेकिन वे हमसे बात कर रहे हैं और संभव है कि हमारा क्यूबा पर एक फ्रेंडली टेकओवर हो जाए।”
ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि “फ्रेंडली टेकओवर” से उनका आशय क्या है। क्या यह आर्थिक सहयोग का विस्तार होगा, राजनीतिक समझौता होगा या किसी नए समझौते के तहत प्रभाव बढ़ाने की रणनीति—इस पर उन्होंने कोई ठोस जानकारी नहीं दी। उन्होंने इतना जरूर कहा कि ऐसा कदम अमेरिका में रहने वाले क्यूबाई मूल के लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है।
President Donald J. Trump on the United States military combat operations in Iran: pic.twitter.com/LimJmpLkgZ
— The White House (@WhiteHouse) February 28, 2026
क्यूबाई-अमेरिकियों का मुद्दा
ट्रम्प ने अपने बयान में उन क्यूबाई मूल के अमेरिकियों का जिक्र किया, जो दशकों पहले क्यूबा छोड़कर अमेरिका आए थे। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग अपने मूल देश से फिर जुड़ना चाहते हैं। ट्रम्प ने संकेत दिया कि वर्तमान बातचीत से वे लोग संतुष्ट हैं और किसी सकारात्मक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि अमेरिका और क्यूबा के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। आर्थिक प्रतिबंध, राजनीतिक मतभेद और वैचारिक टकराव ने दोनों देशों के रिश्तों को दशकों तक जटिल बनाए रखा। हालांकि बीच-बीच में संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास भी हुए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका।
ईरान के साथ बढ़ता तनाव
ट्रम्प की ईरान संबंधी टिप्पणी भी वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा मुद्दों को लेकर लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी रही है। यदि अमेरिका ईरान की नौसेना और मिसाइल उद्योग के खिलाफ किसी बड़े कदम की ओर बढ़ता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन यदि इन्हें व्यवहारिक नीति में बदला गया तो क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
ग्रीनलैंड पर पहले भी दे चुके हैं बयान
ट्रम्प की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वह पहले भी ग्रीनलैंड को लेकर बयान दे चुके हैं। उन्होंने अतीत में संकेत दिया था कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण या अधिग्रहण को लेकर रुचि रखता है। उस समय भी उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी।
वैश्विक प्रतिक्रिया की संभावना
ट्रम्प के हालिया बयान पर अभी तक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इसे गंभीरता से देखा जा रहा है। ईरान को लेकर आक्रामक भाषा और क्यूबा के संदर्भ में ‘टेकओवर’ जैसे शब्दों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संवेदनशील माना जाता है।
यदि अमेरिका और क्यूबा के बीच कोई नया समझौता या रणनीतिक बदलाव सामने आता है, तो यह लैटिन अमेरिका की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं ईरान के साथ किसी संभावित टकराव की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर असर डाल सकती है।
फिलहाल ट्रम्प के इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ये केवल राजनीतिक बयान हैं या किसी व्यापक रणनीति की भूमिका।
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