अत्यधिक ठंड और बर्फीले हालात में होगा सैन्य प्रशिक्षण, अतिरिक्त जवान जल्द पहुंचेंगे

कोपेनहेगन/नूक। आर्कटिक क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियों के बीच डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने का फैसला किया है। डेनमार्क के रक्षा प्रतिष्ठान के अनुसार, आने वाले कुछ घंटों में ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती की जाएगी। यह कदम वहां पहले से चल रहे सैन्य अभ्यास के तहत उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कठोर आर्कटिक परिस्थितियों में सैनिकों की क्षमता और तैयारियों को परखना है।

डेनिश सशस्त्र बलों ने की बड़ी तैनाती की पुष्टि

डेनमार्क के सरकारी प्रसारक डीआर के मुताबिक, डेनिश सशस्त्र बल ने यह पुष्टि की है कि ग्रीनलैंड में सेना की “काफी बड़ी” तैनाती की जाएगी। हालांकि सुरक्षा कारणों से अभी इस तैनाती से जुड़ी संख्या और संसाधनों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि यह अभ्यास लंबे समय तक चल सकता है और इसमें विशेष रूप से आर्कटिक युद्ध कौशल पर जोर दिया जाएगा।

कांगेरलुसुआक पहुंचेगी अतिरिक्त टुकड़ी

स्थानीय प्रसारक टीवी2 की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सैनिकों के सोमवार शाम तक ग्रीनलैंड के कांगेरलुसुआक क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है। यह इलाका ग्रीनलैंड का एक महत्वपूर्ण सैन्य और परिवहन केंद्र माना जाता है। इसी दौरान डेनमार्क के सेना प्रमुख मेजर जनरल पीटर एच. बॉयसेन भी वहां मौजूद रहेंगे और अभ्यास की प्रगति की निगरानी करेंगे।

कठोर मौसम में हथियार संचालन और सुरक्षा अभ्यास

डेनिश सेना की ओर से ग्रीनलैंड में चल रहे सैन्य अभ्यास की पहली तस्वीरें भी जारी की गई हैं। सेना के बयान के अनुसार, सैनिक अत्यधिक ठंड, तेज़ हवाओं और भारी बर्फबारी जैसे हालात में हथियारों के संचालन, गश्त और सुरक्षा अभ्यास पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में सैनिक आर्कटिक क्षेत्र में प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सकें।

आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ता रणनीतिक महत्व

ग्रीनलैंड एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन आर्कटिक क्षेत्र में इसकी भौगोलिक स्थिति इसे वैश्विक स्तर पर बेहद अहम बनाती है। हाल के वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र को लेकर अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और रणनीतिक रुचि में तेजी आई है। ऐसे में डेनमार्क की ओर से ग्रीनलैंड में सैन्य तैयारियों को मजबूत करना केवल अभ्यास भर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और उपस्थिति को लेकर एक स्पष्ट संदेश भी माना जा रहा है।

सुरक्षा और निगरानी पर रहेगा फोकस

रक्षा जानकारों का मानना है कि इस सैन्य अभ्यास के जरिए डेनमार्क न केवल अपने सैनिकों को कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में अपनी निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को भी परख रहा है। आने वाले दिनों में इस अभ्यास के दायरे और गतिविधियों को और विस्तार मिलने की संभावना है।

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