भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पहले भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (आईआईसीडीईएम) 2026 की मेजबानी करने जा रहा है। यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 21 से 23 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा। सम्मेलन का आयोजन भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान की ओर से किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से लोकतंत्र और चुनावी व्यवस्था से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे।

लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन पर वैश्विक मंथन का मंच

चुनाव आयोग के अनुसार, आईआईसीडीईएम 2026 अब तक भारत द्वारा आयोजित निर्वाचन प्रबंधन और लोकतंत्र के विषय पर सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन के माध्यम से दुनिया भर में अपनाई जा रही चुनावी प्रणालियों, तकनीकी नवाचारों, पारदर्शिता, निष्पक्षता और मतदाता सहभागिता जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और विभिन्न देशों के अनुभवों को साझा कर बेहतर चुनावी व्यवस्थाओं के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।

70 से अधिक देशों की भागीदारी, 100 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि होंगे शामिल

आईआईसीडीईएम 2026 में विश्व के 70 से अधिक देशों से लगभग 100 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें विभिन्न देशों के निर्वाचन आयोगों के अधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारत में स्थित विदेशी मिशनों के अधिकारी, शिक्षाविद, नीति विशेषज्ञ और निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ भाग लेंगे। यह विविध भागीदारी सम्मेलन को एक बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान करेगी, जिससे वैश्विक लोकतांत्रिक चुनौतियों और समाधानों पर समग्र विचार-विमर्श संभव हो सकेगा।

भारत की लोकतांत्रिक साख को मिलेगा अंतर्राष्ट्रीय मंच

चुनाव आयोग का मानना है कि यह सम्मेलन भारत की मजबूत और विश्वसनीय चुनावी प्रणाली को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत ने विशाल मतदाता आधार, तकनीकी नवाचारों और शांतिपूर्ण चुनावी प्रक्रियाओं के माध्यम से विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। आईआईसीडीईएम 2026 के जरिए भारत न केवल अपने अनुभव साझा करेगा, बल्कि अन्य देशों से सीख लेकर लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में ठोस पहल करेगा।

नीतिगत संवाद और भविष्य की दिशा तय करेगा सम्मेलन

तीन दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों, संवादों और विचार-विमर्श के माध्यम से निर्वाचन प्रबंधन से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों, डिजिटल तकनीक की भूमिका, मतदाता विश्वास, चुनावी पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का वैश्विक संवाद भविष्य में निष्पक्ष और समावेशी चुनावी प्रणालियों के विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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