मॉडर्न लाइफस्टाइल और बिगड़ा सर्काडियन रिदम कर रहा गट हेल्थ को कमजोर

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लगातार घंटों बैठकर काम करना, नाइट शिफ्ट, देर रात तक मोबाइल और सोशल मीडिया पर स्क्रोलिंग तथा बढ़ता मानसिक तनाव आम हो चुका है। इस बदली हुई जीवनशैली का सीधा असर खानपान की आदतों पर भी पड़ा है। व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग प्रोसेस्ड फूड पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं और देर रात खाना अब सामान्य आदत बनती जा रही है। हालांकि यह आदत सुविधाजनक जरूर लगती है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर गंभीर और लंबे समय तक असर पड़ सकते हैं।

शारदाकेयर हेल्थसिटी में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिजीत सिंह के अनुसार देर रात खाना धीरे-धीरे आंतों को नुकसान पहुंचाता है। इसका सीधा प्रभाव न केवल पाचन तंत्र पर, बल्कि इम्यून सिस्टम और पूरे शरीर की सेहत पर पड़ता है। वे बताते हैं कि शुरुआत में इसके लक्षण मामूली लगते हैं, लेकिन समय के साथ यह एक गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं।

देर रात खाने से शरीर की प्राकृतिक घड़ी बिगड़ती है

मानव शरीर एक नेचुरल सर्काडियन रिदम के अनुसार काम करता है। यही जैविक घड़ी तय करती है कि किस समय पाचन तेज होगा और किस समय शरीर को आराम की जरूरत है। आमतौर पर रात के समय पाचन तंत्र की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं ताकि शरीर खुद को रिपेयर कर सके। जब देर रात खाना खाया जाता है, तो आंतों को उस समय भी काम करना पड़ता है, जब उन्हें आराम मिलना चाहिए। इससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है और आंतों का फंक्शन धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है।

इसका नतीजा एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स, गैस, अपच, पोषक तत्वों का सही तरह से अवशोषण न होना और मेटाबॉलिक समस्याओं के रूप में सामने आता है। कई लोगों में देर रात खाने के बाद बेचैनी और नींद न आने की शिकायत भी इसी वजह से होती है।

प्रोसेस्ड फूड से बिगड़ता है गट बैक्टीरिया का संतुलन

लंबे समय तक टिके रहने वाले प्रोसेस्ड फूड में आमतौर पर रिफाइंड शुगर, अनहेल्दी फैट और तरह-तरह के केमिकल्स होते हैं। इनमें फाइबर और जरूरी पोषक तत्व बेहद कम होते हैं। ऐसे भोजन का लगातार सेवन गट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की संख्या को घटाता है और हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देता है। धीरे-धीरे आंतों का माइक्रोबायोम असंतुलित होने लगता है।

डिस्बायोसिस क्या है और क्यों है खतरनाक

गट बैक्टीरिया के इसी असंतुलन को मेडिकल भाषा में डिस्बायोसिस कहा जाता है। इस स्थिति में आंतों की अंदरुनी दीवार कमजोर हो सकती है, सूजन बढ़ सकती है और इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता घटने लगती है। शोध बताते हैं कि लंबे समय तक डिस्बायोसिस रहने से आईबीएस, मोटापा, डायबिटीज और मूड डिसऑर्डर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

डिस्बायोसिस का असर केवल पेट तक सीमित नहीं रहता। यह पूरे शरीर में सूजन बढ़ाने वाला कारक बन सकता है, जिससे व्यक्ति खुद को लगातार थका हुआ और अस्वस्थ महसूस करता है।

खराब गट हेल्थ का असर पूरे शरीर पर

विशेषज्ञों के मुताबिक गट हेल्थ खराब होने से केवल पाचन ही नहीं बिगड़ता, बल्कि दिमागी स्वास्थ्य और इम्यून सिस्टम भी प्रभावित होता है। कमजोर इम्यूनिटी के कारण बार-बार संक्रमण होने लगते हैं। इसके अलावा हॉर्मोन असंतुलन, नींद की परेशानी, वजन बढ़ना और मानसिक चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। कई मामलों में लंबे समय तक देर रात खाने की आदत डिप्रेशन और एंग्जायटी से भी जुड़ी पाई गई है।

विशेषज्ञों की सलाह: समय पर भोजन है सबसे बड़ी दवा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए भोजन का समय बेहद महत्वपूर्ण है। कोशिश करनी चाहिए कि रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले खा लिया जाए। हल्का, फाइबर युक्त और कम प्रोसेस्ड भोजन आंतों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। साथ ही नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी गट हेल्थ को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

बदलती जीवनशैली में देर रात खाना भले ही आसान समाधान लगे, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे शरीर के अंदरूनी संतुलन को बिगाड़ सकती है। समय रहते खानपान की आदतों में सुधार करना ही लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जा रहा है।

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