नकद भुगतान पीछे छूटा, गांव और छोटे कस्बों में रुपे डेबिट कार्ड के लिए लक्षित पहल जरूरी

नई दिल्ली, 16 फरवरी (हि.स.)। देश में डिजिटल भुगतान की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है और अब यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई लेनदेन का सबसे पसंदीदा माध्यम बनकर उभरा है। नकद भुगतान का उपयोग तेजी से घट रहा है, जबकि मोबाइल आधारित भुगतान को आम लोग अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से जारी एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गांवों और छोटे कस्बों में रुपे डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विशेष और लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता बनी हुई है।

चिंतन शिविर में जारी हुई अहम रिपोर्ट

वित्तीय सेवा विभाग ने 13 और 14 फरवरी को आयोजित चिंतन शिविर के दौरान ‘रुपे डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले भीम-यूपीआई व्यक्ति से व्यापारी लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण’ शीर्षक से यह अध्ययन जारी किया। इस रिपोर्ट का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को आगे बढ़ाने, भुगतान ढांचे को मजबूत करने और वित्तीय समावेशन की दिशा में सरकार द्वारा अपनाए गए प्रोत्साहन उपायों की प्रभावशीलता का आकलन करना था।

डिजिटल लेनदेन में कई गुना उछाल

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 से वर्ष 2025 के बीच डिजिटल लेनदेन में लगभग 11 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान कुल डिजिटल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि उपभोक्ता तेजी से नकद की जगह इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को अपना रहे हैं। सरकार और बैंकिंग तंत्र की ओर से बनाए गए सरल ढांचे ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

लोगों की पहली पसंद बना यूपीआई

सर्वेक्षण में शामिल उत्तरदाताओं के बीच यूपीआई सबसे लोकप्रिय भुगतान माध्यम के रूप में सामने आया। करीब 57 प्रतिशत लोगों ने इसे अपनी पहली पसंद बताया, जबकि नकद लेनदेन को 38 प्रतिशत ने प्राथमिकता दी। उपयोग में सरलता और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा को इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह माना गया। लोगों का कहना है कि मोबाइल के जरिए कुछ ही क्षणों में भुगतान पूरा हो जाना उनके लिए समय और मेहनत दोनों की बचत करता है।

व्यापक सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन

यह सामाजिक-आर्थिक प्रभाव विश्लेषण बड़े पैमाने पर किए गए प्राथमिक सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें 15 राज्यों के 10,378 लोगों को शामिल किया गया। इनमें 6,167 उपयोगकर्ता, 2,199 व्यापारी और 2,012 सेवा प्रदाता थे। अध्ययन से यह भी पता चला कि यूपीआई और रुपे कार्ड का उपयोग शुरू करने के बाद करीब 90 प्रतिशत लोगों का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा है। इसके साथ ही नकदी के इस्तेमाल और एटीएम से पैसे निकालने की जरूरत में उल्लेखनीय कमी आई है।

रुपे कार्ड के लिए अभी और काम बाकी

हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रुपे डेबिट कार्ड की स्वीकार्यता बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए जागरूकता, तकनीकी सहायता और व्यापारियों के लिए सुविधाजनक ढांचे जैसे कदम जरूरी बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन क्षेत्रों में लक्षित प्रयास किए जाएं तो डिजिटल भुगतान का दायरा और तेजी से बढ़ सकता है।

भविष्य की नीतियों को मिलेगा आधार

वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष आगे की नीति निर्माण प्रक्रिया में उपयोगी साबित होंगे। इससे भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को और अधिक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी बनाने में मदद मिलेगी। सरकार की प्राथमिकता ऐसी सार्वजनिक डिजिटल व्यवस्था तैयार करना है, जो आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ हर वर्ग को वित्तीय प्रणाली से जोड़े।

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