ट्रेड वॉर की आशंका और विदेशी बिकवाली से सेंसेक्स 1065 अंक लुढ़का, निफ्टी भी भारी गिरावट के साथ बंद

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ट्रेड वॉर की आशंका और घरेलू स्तर पर तीसरी तिमाही के मिले-जुले नतीजों ने मिलकर बाजार पर गहरा दबाव बना दिया। नतीजतन, बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,065.71 अंक टूटकर 82,180.47 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 353 अंक की गिरावट के साथ 25,232.50 अंक के स्तर पर आ गया। इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों की संपत्ति से करीब 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

कारोबार की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई थी और शुरुआती सत्र में बाजार ने संभलने की कोशिश भी की। कुछ समय के लिए चुनिंदा शेयरों में हल्की खरीदारी देखने को मिली, लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं सकी। जैसे-जैसे वैश्विक बाजारों से नकारात्मक संकेत मिले और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली तेज हुई, वैसे-वैसे घरेलू बाजार में भी दबाव बढ़ता चला गया। दोपहर बाद बिकवाली ने व्यापक रूप ले लिया और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों ही अपने दिन के निचले स्तरों के आसपास बंद हुए। पूरे दिन के कारोबार के बाद सेंसेक्स में 1.28 प्रतिशत और निफ्टी में 1.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रियल्टी सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार

मंगलवार का दिन सेक्टोरल इंडेक्स के लिहाज से भी बेहद निराशाजनक रहा। दिनभर के कारोबार के दौरान लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा चोट रियल्टी सेक्टर को लगी, जहां बिकवाली का दबाव सबसे अधिक रहा और रियल्टी इंडेक्स करीब 5 प्रतिशत तक टूट गया। ऊंची ब्याज दरों की आशंका और मांग को लेकर अनिश्चितता ने इस सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दीं। इसके अलावा आईटी, मेटल, मीडिया, ऑटोमोबाइल, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भी 1.50 प्रतिशत से लेकर 2.50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। कैपिटल गुड्स, एफएमसीजी, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज और टेक इंडेक्स भी दबाव में रहे और सभी प्रमुख सूचकांक कमजोर बंद हुए।

बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट

शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण कारोबार के अंत तक घटकर 455.78 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 465.68 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह महज एक सत्र में बाजार पूंजीकरण में करीब 9.90 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बाजार जानकारों के अनुसार यह गिरावट हाल के महीनों में एक दिन में हुई सबसे बड़ी गिरावटों में शामिल है।

वैश्विक संकेतों से बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर व्यापार युद्ध की आशंका ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते तनाव, आयात-निर्यात शुल्क को लेकर अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने दबाव को और गहरा कर दिया। घरेलू मोर्चे पर तीसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहने से भी निवेशकों की निराशा बढ़ी।

आगे की राह पर नजर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निकट भविष्य में बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी पूंजी की वापसी शुरू होती है, तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि अस्थिरता का दौर अभी पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा।

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