चेन्नई, केरल और कर्नाटक में एक साथ तलाशी, त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के आवास पर भी कार्रवाई

विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना चोरी मामले में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में कुल 21 स्थानों पर छापेमारी शुरू की। इस समन्वित अभियान के तहत तमिलनाडु के अंबत्तूर और चेन्नई शहर में छह ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई, जिससे पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय लेनदेन के पहलुओं की गहन जांच तेज हो गई है।

तमिलनाडु में छह ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय की कई टीमें मंगलवार सुबह से ही चेन्नई और अंबत्तूर में सक्रिय रहीं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिन स्थानों पर तलाशी ली गई, उनमें कथित रूप से सोना निकालने और उसे आगे खपाने से जुड़े व्यक्तियों के आवास और उनसे संबद्ध परिसरों को शामिल किया गया है। दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और लेनदेन से संबंधित अभिलेख खंगाले जा रहे हैं, ताकि चोरी किए गए सोने की श्रृंखला और उससे अर्जित धन की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के घर तलाशी

कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की टीम आज त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पीएच पद्मकुमार के आवास पर भी पहुंची और तलाशी शुरू की। बोर्ड सबरीमाला मंदिर के प्रशासन से जुड़ा प्रमुख निकाय है, ऐसे में पूर्व पदाधिकारी के यहां की गई तलाशी से जांच की दिशा और गंभीरता दोनों स्पष्ट होती हैं। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर प्रशासन, ठेकेदारों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

वर्ष 2019 की मरम्मत के दौरान सामने आया था घोटाला

दरअसल, यह मामला वर्ष 2019 में उस समय प्रकाश में आया था, जब सबरीमाला अयप्पा मंदिर के सोने से मढ़े दरवाजों और द्वारपालों की प्रतिमाओं की मरम्मत कराई जा रही थी। मरम्मत के बाद सामने आया कि निर्धारित मात्रा की तुलना में सोने का वजन कम है। जांच में यह खुलासा हुआ कि मरम्मत से पहले मौजूद लगभग 43 किलोग्राम सोने में से करीब 4.5 किलोग्राम सोना गायब है। इस खबर के सामने आते ही देशभर में सनसनी फैल गई थी और मंदिर की सुरक्षा व प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे थे।

विशेष जांच टीम की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष जांच टीम का गठन किया गया। टीम की जांच में यह बात सामने आई कि चेन्नई में रासायनिक मिश्रण का उपयोग कर सोना अलग किया गया था। इस प्रक्रिया से यह संकेत मिला कि चोरी केवल मौके की नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित तकनीकी तैयारी और बाहरी नेटवर्क भी सक्रिय था। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क के विभिन्न हिस्सों की पहचान करते हुए कई दौर की पूछताछ की।

मंदिर तंत्री की भूमिका और अब तक की गिरफ्तारियां

जांच आगे बढ़ने पर यह भी सामने आया कि मंदिर के तंत्री राजीव कंदरू की भूमिका संदिग्ध है। विशेष जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में तंत्री सहित कुल 10 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इन गिरफ्तारियों के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सोना चोरी की घटना केवल व्यक्तिगत लालच का परिणाम नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश का हिस्सा थी।

मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल पर केंद्रित ईडी की जांच

अब प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में धन शोधन की आशंका के तहत जांच तेज कर दी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए सोने से अर्जित धन को किन माध्यमों से वैध बनाने की कोशिश की गई, किन खातों और संपत्तियों में उसका निवेश हुआ और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। तीन राज्यों में एक साथ छापेमारी इसी व्यापक जांच का हिस्सा मानी जा रही है।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अधिकारियों के अनुसार, तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा और बढ़ने तथा कुछ नए नाम सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल, देशभर की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रवर्तन निदेशालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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